उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में भीषण गर्मी का कहर जारी
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में इन दिनों तेज गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। आसमान से आग की तरह तापमान बरस रहा है और धरती तप रही है। बांदा जिले का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच चुका है। मौसम विभाग (IMD) ने पहले ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जिसे अब रेड अलर्ट में बदल दिया गया है। लगातार कई दिनों से यह जिला देश के सबसे गर्म इलाकों में शुमार हो रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है।
गर्मी बढ़ने के मुख्य कारण और प्राकृतिक प्रभाव
बुंदेलखंड में गर्मी के बढ़ने के पीछे कई प्राकृतिक और स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं। जिला कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के बहुत करीब होने के कारण सूर्य की तीव्र किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं। आसमान में बादल न होने के कारण सूर्य की किरणें बिना किसी बाधा के धरती को तपाने में लगी हैं। इसके अलावा, वन क्षेत्र का भारी कटान भी गर्मी को बढ़ावा दे रहा है। डॉ. दिनेश शाह के अनुसार, आदर्श स्थिति में पेड़-पौधों का क्षेत्रफल 22 से 33 प्रतिशत होना चाहिए, लेकिन यहां यह मात्र 11 से 12 प्रतिशत ही रह गया है। पेड़ों की कमी से सीधे सूर्य की किरणें जमीन को और अधिक गर्म कर रही हैं।
गर्मी के अन्य कारण और प्रभावशाली आंकड़े
इसके अतिरिक्त, नदियों में पानी की कमी, खनन गतिविधियों का बढ़ना, धूलकणों की अधिकता और पश्चिमी पछुवा हवाओं का चलना भी गर्मी को और बढ़ा रहा है। सूखी नदियों और खनन क्षेत्रों से सूर्य की परावर्तित किरणें (Reflection) बढ़ रही हैं, जिससे बैक रेडिएशन (Back Radiation) में इजाफा हो रहा है। ऊपर से सूर्य की आग और नीचे से गर्मी का उबाल मिलकर तापमान को और भी अधिक बढ़ा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले दस दिनों में तापमान में लगातार वृद्धि देखी गई है। 10 मई को तापमान लगभग 46 डिग्री था, जो कुछ दिनों बाद 47 डिग्री तक पहुंच गया। 14 मई को हल्की बारिश के कारण तापमान में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन फिर से तेजी से बढ़ने लगा। 17 मई को तापमान में तेज़ी से वृद्धि हुई और 18 मई को यह 47 डिग्री पार कर गया। 19 मई को यह 48 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस बार गर्मी सामान्य से कहीं अधिक है, और पेड़ काटने, नदियों के सूखने, खनन और पछुवा हवाओं के कारण तापमान में इजाफा हो रहा है।









