भोपाल एयरपोर्ट पर राजनीतिक तनाव का नजारा
मंगलवार की सुबह भोपाल (Bhopal) एयरपोर्ट पर पहुंचते ही माहौल पूरी तरह से राजनीतिक गतिविधियों से भरा हुआ नजर आ रहा था। कांग्रेस (Congress) के विधायकों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि उन्हें अगले कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु (Bangalore) जाना है। कई विधायक रातभर खरीदारी कर सीधे एयरपोर्ट पहुंचे थे, जबकि कुछ अपने परिवार के साथ आए थे, मानो आने वाले दिनों में यह यात्रा पारिवारिक छुट्टियों का रूप ले ले।
लेकिन जैसे ही वे एयरपोर्ट पहुंचे, उन्हें पहला झटका लगा। कांग्रेस विधायकों को लेकर बेंगलुरु जाने वाला विशेष विमान अभी तक भोपाल (Bhopal) नहीं पहुंचा था। बोर्डिंग पास बनाने में भी देरी हो रही थी, इसलिए सभी को इंतजार करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान बाहर गर्मी और उमस का माहौल था, और विधायक अपने-अपने परिवारों के साथ एयरपोर्ट के बाहर खड़े होकर विमान का इंतजार कर रहे थे।
विमान की देरी और राजनीतिक घटनाक्रम का मोड़
विमान के देर से आने के कारण इंतजार का समय बढ़ता गया। दोपहर एक बजे से शुरू हुआ यह इंतजार लगातार चलता रहा, और गर्मी का असर चेहरे पर साफ दिखने लगा। शाम के करीब पांच बजे अंततः विशेष विमान पहुंचा, और विधायकों को एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश मिला। लेकिन तब तक लगभग चार घंटे से अधिक का इंतजार सभी को थका चुका था।
इसी बीच राजनीतिक घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। खबर आई कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में एक मामले की जानकारी नहीं दी। यह खबर सुनते ही एयरपोर्ट पर मौजूद कांग्रेस नेताओं के चेहरे बदल गए।
विधानसभा में हुई तकरार और नामांकन रद्द
कुछ ही मिनटों में जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, मीनाक्षी नटराजन और अन्य नेता विधानसभा के लिए रवाना हो गए। क्योंकि विधायक एयरपोर्ट के अंदर पहुंच चुके थे, इसलिए वहां की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैं भी विधानसभा जाने का फैसला किया। करीब आधे घंटे बाद मैं विधानसभा परिसर पहुंचा, जहां दो घंटे तक तीव्र राजनीतिक और कानूनी बहसें चलती रहीं। बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच तकरार जारी रही, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की स्क्रूटनी कर रहे थे।
शाम के लगभग 6:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर ने फैसला सुनाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के साथ ही विधानसभा में बीजेपी के चेहरे खिल उठे, जबकि कांग्रेस खेमे में सन्नाटा छा गया। वहीं, एयरपोर्ट पर भी हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों को लेकर जा रहा विमान वापस बुला लिया गया, और उन्हें उतरना पड़ा। इस पूरी योजना का अंत कुछ ही मिनटों में हो गया।
इसके बाद मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस नेताओं के साथ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचीं, जहां बैठकें शुरू हुईं। शाम साढ़े सात बजे कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया। रात करीब नौ बजे मैं कांग्रेस कार्यालय के छोटे से हॉल में पहुंचा, जहां माहौल गंभीर और खामोश था। मीनाक्षी नटराजन और वरिष्ठ नेताओं की चेहरे पर उदासी और गुस्सा साफ झलक रहा था।
मीनाक्षी नटराजन ने बीजेपी पर लगाए कई आरोप
जब अधिकांश नेता वहां से जाने लगे, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या वे इस पूरे मामले पर बात करना चाहेंगे। उन्होंने तुरंत सहमति दी। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और खरीद-फरोख्त की कोई संभावना नहीं है, तो इस रास्ते को अपनाया गया। उनका आरोप था कि जिस मामले को आधार बनाया गया, उसमें न तो कोर्ट ने कोई संज्ञान लिया और न ही कोई मुकदमा दर्ज हुआ।
उन्होंने कहा कि यह कोई कानूनी लड़ाई नहीं थी, बल्कि राजनीतिक इच्छा शक्ति की हार थी। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र को दबाने की कोशिश की जा रही है।
रातभर चले प्रदर्शन और अंतिम सवाल
दिन का राजनीतिक ड्रामा यहीं खत्म नहीं हुआ। रात होते-होते कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भोपाल के अरेरा हिल्स (Aareara Hills) स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंच गए। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई नेताओं ने धरने पर बैठकर विरोध जताया। करीब दो घंटे चले इस प्रदर्शन के बाद रात लगभग बारह बजे यह सब समाप्त हुआ।
इस तरह सुबह आठ बजे शुरू हुआ यह राजनीतिक घटनाक्रम रात बारह बजे समाप्त हुआ। पूरे दिन मैं इस पूरे घटनाक्रम का साक्षी रहा, जिसमें एयरपोर्ट की बेचैनी से लेकर विधानसभा के फैसले और चुनाव आयोग के बाहर धरने तक का दृश्य शामिल था।
लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या मीनाक्षी नटराजन का नामांकन सिर्फ तकनीकी खामी के कारण रद्द हुआ, या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति छुपी थी?











