हरियाणा के फतेहाबाद में बेरोजगार पिता की प्रेरणादायक कहानी
हरियाणा के फतेहाबाद जिले में संजय नामक एक पिता की कहानी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। दस बेटियों के बाद जब उनका बेटा जन्मा, तो परिवार में खुशी का माहौल छा गया, लेकिन साथ ही जीवन की कठिनाइयां भी बढ़ गईं। बेरोजगारी के बावजूद संजय ने अपनी बेटी को गोद लेकर बाकी बच्चों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। इस परिवार ने बेटियों को समान सम्मान देकर समाज के लिए एक मिसाल कायम की है।
संजय की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा और जिम्मेदारी का निर्वहन
संजय का जीवन आसान नहीं रहा है। वर्ष 2018 में जब वह लोक निर्माण विभाग (PWD) में डेली वेज पर काम कर रहे थे, तो उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) के तहत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण शुरू किया। लेकिन पिछले एक साल से यह काम भी बंद पड़ा है। आज संजय बेरोजगार हैं, पर उन्होंने कभी भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। उनका मानना है कि चाहे काम हो या न हो, बच्चों की जरूरतें पूरी करना उनकी प्राथमिकता है। भोजन, स्कूल, दवाइयां और कपड़े जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया। गांव में छोटे-मोटे काम मिलते ही उन्होंने उसे करने से इनकार नहीं किया।
बेटियों की शिक्षा और परिवार का सामाजिक दृष्टिकोण
संजय और उनकी पत्नी सुनीता की सबसे बड़ी बेटी अभी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। बाकी बेटियां भी पढ़ाई कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद संजय ने कभी बेटियों की शिक्षा में कोई समझौता नहीं किया। गांव के लोग बताते हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद यह परिवार सादगी और आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन करता है। संजय का कहना है कि लोगों के ताने सुनने के बावजूद उन्होंने बेटियों को बोझ नहीं माना। उनका मानना है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
11वीं संतान का जन्म और परिवार में खुशियों का माहौल
हाल ही में सुनीता ने अपनी 11वीं संतान को जन्म दिया, जो पूरी तरह सामान्य तरीके से हुआ। संजय ने अपनी पत्नी की डिलीवरी घर से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक प्राइवेट अस्पताल में कराई, ताकि बेहतर इलाज मिल सके। बच्चे के जन्म के समय उसकी खून की कमी पाई गई, जिसे तुरंत ही डॉक्टरों ने ठीक किया। समय पर इलाज मिलने से बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ है। मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और कुछ दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। बेटे के जन्म से घर में उत्सव का माहौल है। संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि भगवान ने वर्षों बाद उनकी मन्नत पूरी कर दी। उनके जीवन का एक ही सपना था कि घर में एक पोता हो। संजय के पिता कपूर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है, जो लोक निर्माण विभाग में बेलदार के पद पर कार्यरत थे। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी संजय पर आ गई, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया।











