मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धार के विवादित परिसर का पुनर्मूल्यांकन
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला और कमल मौला मस्जिद के विवादित परिसर को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। इस फैसले में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए स्पष्ट किया कि यह स्थल मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है।
अदालत ने यह भी माना कि 11वीं सदी के इस स्मारक में संस्कृत शिक्षा केंद्र और मां वाग्देवी के मंदिर के स्पष्ट संकेत मौजूद हैं। कोर्ट ने उस 21 साल पुराने ASI के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि यदि ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी’ इस स्थल पर मस्जिद बनाने का आवेदन देती है, तो राज्य सरकार जिले में अलग जमीन आवंटित करने पर विचार कर सकती है। अब केंद्र सरकार और ASI इस परिसर के प्रबंधन और भविष्य की संरचना पर अंतिम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
धार विवाद का इतिहास और कोर्ट का निर्णय
धार के इस विवादित स्थल का इतिहास सदियों पुराना है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम पक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं। हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह स्थल मां सरस्वती का मंदिर है और इसे संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना जाता है। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। ASI की रिपोर्ट में भी यह संकेत मिले थे कि इस स्थल का निर्माण मंदिर के खंडहरों और खंभों का पुन: उपयोग कर किया गया था।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति जताई है। धार के शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि उन्हें यह निर्णय स्वीकार्य नहीं है और वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ASI की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और इसमें कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
धार जिले में इस फैसले के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। लगभग 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और पूरे इलाके को बैरिकेड्स से सील कर दिया गया है। साथ ही, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
वहीं, भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म की जीत है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार मंदिरों पर आक्रमण हुए, लेकिन हिंदू धर्म का अस्तित्व कायम रहा। शर्मा ने यह भी आशा व्यक्त की कि मुस्लिम समुदाय भी इस निर्णय को स्वीकार करेगा और पुराने मंदिरों को पुनः स्थापित करने में सहयोग देगा।











