कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन का महत्वपूर्ण कदम
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण परियोजना के तहत एक नई उपलब्धि हासिल हुई है। यहाँ क्वारंटीन अवधि पूरी कर चुकी दो मादा चीता को बड़े बाड़े से निकालकर खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया है। ये दोनों चीता बोत्सवाना (Botswana) से भारत लाई गई थीं। इन चीतों को निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जंगल में आजादी से विचरण करने के लिए रिहा किया गया है। इस कदम से कूनो में जंगल में रहने वाले चीता की कुल संख्या अब 16 हो गई है, जो इस परियोजना की सफलता का संकेत है।
चीता संरक्षण में नई प्रगति और निगरानी व्यवस्था
कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों मादा चीता की सुरक्षा और गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। इसके लिए अत्याधुनिक रेडियो टेलीमेट्री सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो इन चीतों की हर गतिविधि पर निगरानी बनाए रखता है। इसके अतिरिक्त, विशेष फील्ड टीमें भी जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं, जो इन जानवरों की स्थिति का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। इस निगरानी प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चीते सुरक्षित और स्वस्थ रहें, और जंगल में उनका प्राकृतिक जीवनशैली विकसित हो सके।
प्राकृतिक वातावरण में चीता का अनुकूलन और भविष्य की योजनाएँ
अधिकारियों का कहना है कि दोनों मादा चीता पूरी तरह स्वस्थ हैं और जंगल के वातावरण में ढलने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। शुरुआती दिनों में उनके व्यवहार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उनकी अनुकूलन प्रक्रिया सही ढंग से पूरी हो सके। वन विभाग का मानना है कि अफ्रीकी चीतों को भारत के जंगलों में बसाने का यह प्रयास लगातार सफल हो रहा है। धीरे-धीरे, इन जानवरों को बड़े बाड़ों से मुक्त कर जंगल में छोड़ा जा रहा है, ताकि वे प्राकृतिक जीवनशैली अपना सकें और शिकार करने की क्षमता विकसित कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण कूनो में चीता संरक्षण परियोजना मजबूत हो रही है। आने वाले समय में और भी चीते जंगल में छोड़े जाएंगे, जिससे इस परियोजना की सफलता और बढ़ेगी।










