दिल्ली कोर्ट ने रंगदारी मामले में आरोपी को जमानत दी
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में एक आरोपी को राहत प्रदान की है। इस मामले में आरोप है कि एक रक्षा क्षेत्र के व्यवसायी को धमकी देकर आरोपी ने भारी रकम की मांग की थी।
विशेष रूप से, कोर्ट ने इस मामले में आरोपी गुरपिंदर सिंह को नियमित जमानत दी है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच पूरी हो चुकी है और अब आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
रक्षा उपकरण कंपनी से जुड़ा था मामला, धमकियों का सिलसिला जारी
यह पूरा मामला रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनी ‘विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ के संस्थापक साहिल लूथरा से संबंधित है। साहिल लूथरा दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में रहते हैं।
आरोप है कि उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय नंबरों से लगातार धमकी भरे व्हाट्सएप संदेश और फोन कॉल मिल रहे थे। इन कॉल्स और मैसेज के माध्यम से उनसे 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी गई थी। आरोपियों ने धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो साहिल लूथरा और उनके परिवार के सदस्यों को जान से मार दिया जाएगा।
पुलिस ने शुरू में धमकियों की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की
प्रारंभ में अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान पुलिस को धमकियों की सूचना मिली थी। इसके बाद जून 2026 में फिर से शिकायत दर्ज हुई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। शुरुआत में यह मामला चाणक्यपुरी थाने में दर्ज किया गया था, लेकिन जांच की गंभीरता को देखते हुए इसे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
पुलिस ने 13 जून 2026 को आरोपी गुरपिंदर सिंह को हिरासत में लिया, साथ ही जसवंत सिंह और शमशेर सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि जसवंत सिंह पहले पंजाब पुलिस में सेवा दे चुके हैं और बाद में साहिल लूथरा के साथ काम करने लगे थे।
सुनवाई के दौरान, गुरपिंदर सिंह के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह कोई आदतन अपराधी नहीं हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
अंत में, न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत का फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि इस मामले में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है और पूरी कानूनी प्रक्रिया में अभी समय लग सकता है।
गुरपिंदर सिंह को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार की पेशकश पर जमानत दी गई है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जमानत केवल प्रक्रिया का हिस्सा है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।











