सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने से जीवन में संकट
हरियाणा के फरीदाबाद में एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां बल्लभगढ़ के मिर्जापुर गांव के निवासी पवन कुमार को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया है। 49 वर्षीय पवन पिछले दो वर्षों से अपनी जीवित स्थिति साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी पहचान सही ढंग से स्थापित नहीं हो सकी है।
आवश्यक सुधार के लिए बार-बार शिकायतें, लेकिन कोई समाधान नहीं
पवन कुमार का कहना है कि उन्होंने इस त्रुटि को सुधारने के लिए जिला उपायुक्त कार्यालय, समाधान शिविर और अन्य संबंधित विभागों में कई बार शिकायत दर्ज कराई है। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इस गलती के कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक गया है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।
सरकारी सिस्टम की खामियों से जूझ रहा पीड़ित
पवन कुमार ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से लगातार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। हर बार दस्तावेजों की जांच और सुधार की प्रक्रिया में उलझा दिया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला है। इस स्थिति ने उनके जीवन को मानसिक और आर्थिक दोनों ही रूप से प्रभावित किया है।
यह मामला सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। एक जीवित व्यक्ति का मृतक के रूप में दर्ज होना न केवल प्रशासनिक त्रुटि है, बल्कि इससे नागरिकों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं। पवन कुमार अब उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही उनकी पहचान सही करेगा और उन्हें उनके अधिकार एवं सुविधाएं पुनः प्रदान करेगा। वर्तमान में यह मामला स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।











