दिल्ली के मालवीय नगर में भीषण आग से परिवार का विनाश
दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक होटल में लगी भीषण आग ने एक पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक हादसे में पहले ही गुरुग्राम निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के सात सदस्यों की जान चली गई थी। अब इस परिवार का अंतिम सदस्य और विवेक के पिता 75 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल का भी निधन हो गया है। वह साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
आग लगने के बाद परिवार का अंतिम अंत और मौत का सिलसिला
राधेश्याम अग्रवाल की मौत बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों की दर्दनाक मौत के मात्र छह दिन बाद हुई। सोमवार 9 जून को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही उस परिवार का आखिरी सदस्य भी दुनिया से विदा हो गया, जिसने कुछ ही दिनों में अपने करीबियों को खो दिया। उल्लेखनीय है कि 3 जून की सुबह दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें गुरुग्राम के विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के कई सदस्य भी शामिल थे। आग इतनी भयावह थी कि होटल में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
परिवार की दुखद कहानी और आग का कहर
इस हादसे में विवेक अग्रवाल, उनकी मां प्रेमलता, पत्नी तर्जनी, बेटियां जीविशा और वारिया सहित राजस्थान से आए उनके रिश्तेदार भी मारे गए। मृतकों में विवेक के मौसा जवरी लाल, मौसी कमला और मामा अशोक पंसारी भी शामिल थे। इस तरह से अग्रवाल परिवार और उनके करीबी कुल आठ सदस्यों की जान चली गई। विवेक पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और गुरुग्राम में रहते थे। उनके पिता राधेश्याम का इलाज साकेत के मैक्स अस्पताल में चल रहा था, जहां वह फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे। परिवार के सदस्य अस्पताल में भर्ती पिता की देखभाल के लिए दिल्ली आए थे।
होटल में आग लगने के बाद पूरे परिवार का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। आग इतनी भयानक थी कि कई लोग बाहर निकल नहीं सके और जिंदा जलकर मौत के घाट उतर गए। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। राधेश्याम अग्रवाल भी अस्पताल में गंभीर स्थिति में थे और छह दिन तक जीवन और बीमारी से संघर्ष करने के बाद उन्होंने भी अंतिम सांस ली। इस तरह इस परिवार का लगभग पूरा सदस्य ही इस हादसे का शिकार हो गया।
यह घटना दिल्ली के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक मानी जा रही है, जिसने एक परिवार को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। आग ने सब कुछ छीन लिया और परिवार के सदस्य इलाज के लिए दिल्ली आए थे, लेकिन वे अपने प्रियजनों को खोकर शोक में डूब गए। यह कहानी सिर्फ एक आग की त्रासदी नहीं, बल्कि एक परिवार की करुणामय कहानी बन गई है, जिसने कुछ ही दिनों में अपने सभी रिश्ते खो दिए।











