मध्य प्रदेश की देवी सरस्वती की मूर्ति की वापसी का नया खुलासा
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में स्थापित देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति को लंदन से भारत वापस लाने को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्पष्ट किया है कि उनके पास ब्रिटिश म्यूजियम (British Museum) से इस मूर्ति को भारत लौटाने के प्रयासों का कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह जानकारी उन्होंने एक RTI (राइट टू इंफॉर्मेशन) के जवाब में दी है।
यह खुलासा तब हुआ है जब कुछ ही हफ्ते पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मूर्ति को भारत वापस लाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। इंडिया टुडे (India Today) ने ASI से इस मामले में चार प्रमुख जानकारियां मांगी थीं, जिनमें मूर्ति की वापसी की वर्तमान स्थिति, ब्रिटिश म्यूजियम के साथ पत्राचार, इस मुद्दे पर हुई बैठकें और भारत के दावे की कानूनी एवं राजनयिक स्थिति शामिल थीं।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा था दबाव
यह RTI जवाब इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि 15 मई को धार के भोजशाला-कमल मौला परिसर पर हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया था। अदालत ने इस स्थल को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति को भारत वापस लाने के प्रयास करे।
हाई कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद मुख्य याचिकाकर्ता ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मूर्ति की वापसी के लिए कानूनी कदम उठाने की मांग की। उनका तर्क था कि यह मूर्ति केवल एक पुरातात्विक वस्तु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है।
मूर्ति का इतिहास और लंदन पहुंचने का सफर
वाग्देवी की यह मूर्ति 11वीं सदी की मानी जाती है और इसका संबंध राजा भोज के काल से है। हिंदू संगठनों का दावा है कि ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों ने इसे अपने साथ ले गए। 1875 में धार के भोजशाला परिसर में खुदाई के दौरान यह मूर्ति मिली थी। इसके बाद 1880 में एक ब्रिटिश अधिकारी ने इसे अपने साथ इंग्लैंड (England) ले गया।
ब्रिटिश म्यूजियम के रिकॉर्ड के अनुसार, यह मूर्ति उन्हें एक ब्रिटिश अधिकारी ने तोहफे में दी थी, जिसे भोजशाला के खंडहरों से प्राप्त किया गया था। बाद में यह लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम का हिस्सा बन गई। अब इस RTI खुलासे के बाद मूर्ति की भारत वापसी को लेकर सरकारी दावों और प्रयासों पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।











