उज्जैन में खड़ी हनुमान प्रतिमा का विवाद और उसकी स्थिति
उज्जैन शहर में एक प्रमुख सड़क के किनारे खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा का मामला अभी भी सुर्खियों में बना हुआ है। इस सड़क के दोनों ओर पहले मकान थे, जिन्हें चौड़ीकरण परियोजना के तहत हटा दिया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान कई निर्माण कार्यों को तोड़फोड़ कर नई सड़क का स्वरूप तैयार किया गया है, जिससे इलाके की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
हालांकि, इस बदलाव के बीच एक पुरानी प्रतिमा अभी भी अपनी जगह पर खड़ी है। प्रशासन ने इसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। नई जगह का चयन हो चुका था, मंदिर का ढांचा भी तैयार था, और सजावट का काम भी पूरा हो चुका था। यहां तक कि जन्माष्टमी के त्योहार पर प्रतिमा स्थापित करने की योजना भी बन गई थी। लेकिन तीन प्रयासों के बावजूद, खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा अपनी पुरानी जगह से नहीं हिली।
प्रतिमा स्थानांतरण का प्रयास और विरोध
टीम ने उस स्थान का दौरा किया, जहां प्रतिमा को स्थापित करने की योजना थी। टंकी चौक पर नई जगह तैयार की गई थी, और वहां मंदिर का ढांचा भी खड़ा था। इस स्थान पर जगह भी थी और प्रशासन की तैयारी भी पूरी थी। फिर भी, प्रतिमा को स्थानांतरित करने का प्रयास असफल रहा। जन्माष्टमी के मौके पर प्रतिमा को नई जगह पर स्थापित करने का कार्यक्रम था, लेकिन वह योजना भी अधूरी रह गई। वर्तमान में, प्रतिमा अभी भी अपनी पुरानी जगह पर ही है।
इस पूरे मामले में एक और तस्वीर भी है। सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत आसपास के पुराने निर्माण हटा दिए गए हैं। टूटे मकान और बदले हुए ढांचे के बीच नई सड़क का स्वरूप उभर कर आया है। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क को 50 फीट चौड़ा किया गया है, जिससे सड़क का नया रूप सामने आया है। इसी इलाके में हनुमान जी का मंदिर भी है। अब प्रतिमा को हटाने का विरोध तेज हो रहा है।
प्रतिमा का दिशा परिवर्तन और धार्मिक विवाद
असल में, प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का मामला सिर्फ स्थानांतरण का नहीं है। विरोध का एक बड़ा कारण उसकी दिशा भी है। वर्तमान में खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जबकि नई जगह पर इसे उत्तरमुखी बनाने की योजना है। इससे प्रतिमा की दिशा बदलने का सवाल उठता है, जो धार्मिक मान्यताओं और आस्था से जुड़ा है।
कुछ भक्तों का मानना है कि प्रतिमा की दिशा बदलने से धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच सकती है। इस तरह, प्रशासन की पूरी तैयारी के बावजूद, प्रतिमा को हटाने का कार्य आसान नहीं हो पाया है। अभी भी पुरानी जगह पर ही प्रतिमा का विरोध जारी है, और यह मामला जटिलताओं के साथ बना हुआ है।









