उज्जैन की खड़ी हनुमान प्रतिमा का ऐतिहासिक महत्व और विवाद
उज्जैन में खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर हाल के दिनों में कई नई बातें सामने आई हैं। सड़क चौड़ीकरण और मंदिर के भवन को हटाने की प्रक्रिया के बीच इस प्राचीन मूर्ति की उम्र को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिमा लगभग एक हजार वर्ष पुरानी हो सकती है, जिसे प्रमाणित करने के लिए अभी जांच जारी है। इस संदर्भ में पुरातत्व विभाग ने भी इस संभावना को स्वीकार किया है और इसकी पुष्टि के लिए आवश्यक अध्ययन शुरू कर दिए हैं।
प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक संदर्भ की जांच
खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा की ऐतिहासिक महत्ता को समझने के लिए विशेषज्ञ और इतिहासकार अब इस पर गहन अध्ययन कर रहे हैं। प्रतिमा की शिल्पकला, चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, आभूषण और निर्माण शैली का तुलनात्मक विश्लेषण किया जा रहा है। यदि यह प्रतिमा वास्तव में करीब 1000 वर्ष पुरानी साबित होती है, तो यह सवाल उठता है कि वर्तमान मंदिर से पहले यह कहां स्थापित थी। क्या यहां पहले कोई पुराना धार्मिक स्थल मौजूद था या फिर इसे किसी पुराने मंदिर से लाया गया था? इन सवालों का जवाब खोजने के लिए इतिहासकारों की भूमिका अहम हो जाती है।
मंदिर और प्रतिमा का वर्तमान स्थिति एवं श्रद्धालुओं का उत्साह
स्थानीय स्तर पर करीब 170 साल पुराना माना जाने वाला खड़ा हनुमान मंदिर, अब सड़क चौड़ीकरण के कारण उसकी दीवारें हटा दी गई हैं। फिलहाल, प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए टेंट लगाया गया है। इसके बावजूद, श्रद्धालु लगातार मंदिर में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंगलवार को यहां महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें ढोल-ताशे बजते रहे और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। बुधवार को संत समाज ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह प्रतिमा उज्जैन के धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है और वर्षों से यहां भक्त इसकी पूजा करते आ रहे हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली है और इसे हनुमान जी की दिव्य शक्ति से जोड़ा जा रहा है। जिला प्रशासन ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अभी तक प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
संत समाज और स्थानीय लोगों ने भी इस प्रतिमा को यथास्थान रखने का समर्थन किया है। महंत राघवेंद्र दास महाराज ने कहा कि प्रतिमा को वहीं रहने देना चाहिए, जबकि महंत विनीत गिरी महाराज ने प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। इस बीच, कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिमा को हटाने की कथित योजना का विरोध किया है।










