बालाघाट में स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक विवाद
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में हाल ही में स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक विवाद की खबरें सुर्खियों में रहीं। यहां के आदिवासी इलाकों में संक्रामक बीमारियों के कारण कई बच्चों की मौत हो गई है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का दौरा भी विवाद का केंद्र बन गया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे दिखने वाले एक समूह ने उनके दौरे का विरोध किया और सवाल उठाए कि क्या वे इन मौतों का राजनीतिकरण करने आए हैं।
आदिवासी बच्चों की मौत और स्वास्थ्य विभाग की स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इन बच्चों की मौत के पीछे की वजहों का जवाब मांगा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 400 बच्चों का इलाज 50 बेड वाले अस्पताल में किया जा रहा है, जो पर्याप्त नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इलाके में गंदगी का माहौल है, जिससे संक्रमण फैल रहा है और बच्चे लगातार बीमारियों से मर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो में देखा गया कि एक महिला ‘इन्फ्लुएंसर’ दिपके के कार से रवाना होने के दौरान उनके सामने माइक कर रही थी। उसने पूछा कि क्या वे लाशों पर राजनीति करने आए हैं और देर से क्यों पहुंचे। दिपके ने माफी मांगते हुए कहा कि वह इलाके में देर से पहुंचने के लिए खेद व्यक्त करते हैं। महिला ने यह भी कहा, “यहां अच्छी सड़क बनाई गई है, क्या आपको दिखाई नहीं दे रही?” स्थिति बिगड़ने पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को दूसरी कार में बैठाकर ले जाया गया। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि दूरदराज के गांव में बाहर से आए इन समूह को देखकर वे हैरान थे और सवाल कर रहे थे कि क्या इन लोगों को दौरे में बाधा डालने के लिए भेजा गया था।










