ट्विशा शर्मा मौत मामले में नए खुलासे और कानूनी जटिलताएँ
बुधवार को ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। अदालत ने दूसरी पोस्टमार्टम याचिका को खारिज कर दिया है, वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को पत्र लिखेगी। परिवार ने 46 मोबाइल नंबरों का कॉल डाटा और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की है, जिससे मामले की सच्चाई का पता लगाने में मदद मिल सके।
परिवार ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल और आरोप लगाए
ट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बिना उचित कारण के प्रशासनिक देरी से शव खराब हो सकता है और महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह, जो जमानत पर बाहर है, ने न्यायिक परिसर का उपयोग कर मीडिया से बातचीत की और मृतका के खिलाफ बयान दिए। इस संदर्भ में ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल को संवैधानिक ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह की भूमिका की समीक्षा की मांग की है।
मामले की मेडिकल रिपोर्ट और प्रदर्शन
परिवार का दावा है कि एफआईआर और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ का उल्लेख है, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटें भी पाई गई हैं। इन तथ्यों ने परिवार के मन में मौत की असली परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं। वहीं, भोपाल में 50 से अधिक पूर्व सैनिकों ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने और मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के भाई भारतीय सेना में मेजर हैं।









