भोपाल से सागर तक जहरीली शराब का खौफनाक मामला
रविवार का दिन था, और भोपाल में बारिश हो रही थी। मैं अपने दफ्तर जाने की तैयारी कर ही रहा था कि तभी हमारे संवाददाता हिमांशु का फोन आया। उन्होंने बताया कि रात में जहरीली शराब पीने के कारण कई लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं और अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। इस खबर को सुनते ही स्पष्ट हो गया कि अब इस कहानी को कवर करना संभव नहीं है, क्योंकि हमें तुरंत सागर जाना पड़ेगा। सुबह लगभग नौ बजे मैं भोपाल से सागर के लिए रवाना हुआ। रास्ते में लगातार बारिश हो रही थी, और भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी चल रहा था, जिससे यात्रा का समय अपेक्षा से अधिक लग गया। दोपहर ढाई बजे मैं सागर पहुंचा, लेकिन वहां रुकने का मौका नहीं था। जिस क्षेत्र में मौतें हुई थीं, वहां पहुंचना जरूरी था।
सागर से नौराज गांव का दर्दनाक दृश्य
सागर से लगभग 35 किलोमीटर दूर बंडा पहुंचते ही स्थिति तनावपूर्ण थी। सड़क पर शव रखकर लोगों ने रास्ता जाम कर दिया था, और भारी पुलिस बल तैनात था। गुस्सा, आक्रोश और अपने प्रियजनों को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ झलक रहा था। इसके बाद मेरी नजर नौराज गांव पर पड़ी, जहां एक ही गांव के चार लोगों की मौत हुई थी। गांव में प्रवेश करते ही ऐसा लगा जैसे पूरा गांव अपनी आवाज़ खो चुका हो। चार घरों में मौत का साया पसरा था, और मृतकों में अधिकतर युवा थे, जिनकी उम्र करीब 25 से 35 साल के बीच थी। ये युवा मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। जब टीम नौराज पहुंची, तो करतार सिंह लोधी और राजेंद्र लोधी के शव पहले ही गांव लाए जा चुके थे। शव देखकर परिवार के सदस्यों का दर्द फूट पड़ा, महिलाएं रो रही थीं, बुजुर्ग पिता की आंखें पथरा गई थीं, और बच्चे अभी भी यह समझ नहीं पा रहे थे कि उनके घर का वह सदस्य अब कभी वापस नहीं आएगा।
मृतकों की कहानी और गांव का दर्द
30 वर्षीय करतार सिंह लोधी, जो दो बच्चों का पिता था, शनिवार दोपहर करीब तीन बजे शराब पीने के बाद सो गया था। शाम को उसकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। करतार के घर में एक ही परिवार का सहारा चला गया था। उसकी मौत से उसकी पत्नी का जीवन उजड़ गया, और बच्चे अनाथ हो गए। वहीं, 32 वर्षीय राजेंद्र लोधी, जो मजदूरी के लिए इंदौर जाना चाहता था, राखी के त्योहार पर अपनी बहन के साथ था। लेकिन राखी के कुछ ही दिनों बाद, उसकी बहन ने अपने भाई का शव देखा। जब शव गांव पहुंचा, तो उसकी बहन खुद को संभाल नहीं सकी और फूट-फूट कर रोने लगी। पिता भी बेटे का शव देखकर बेहोश हो गए। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है, जहां हर घर में मातम पसरा है।
गांव में फैली अवैध शराब की जालसाजी
नौराज की गलियों और कीचड़ भरे रास्तों पर घूमते हुए एक बात स्पष्ट हो गई कि यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है। यहां अधिकतर युवा, गरीब परिवारों से थे, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। शराब का सेवन यहां कोई नई बात नहीं थी, लेकिन सवाल यह था कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर कहां से आ रही थी? इस सवाल का जवाब खोजते हुए हमें एक चौंकाने वाली तस्वीर मिली। बंडा के एक ढाबे पर, जहां स्थानीय लोगों का दावा था कि सस्ती शराब बेची जाती थी, वहां की तस्वीरें बहुत कुछ कह रही थीं। आसपास शराब की खाली बोतलें और पानी के पाउच पड़े थे, और पीछे जली हुई शराब की बोतलों के निशान भी थे। इनमें सागर गोल्ड ब्रांड की बोतल भी मिली, जिस पर पुलिस भी जांच कर रही थी। हालांकि, सिर्फ बोतल मिलना यह साबित नहीं करता कि इसी जगह से जहरीली शराब आई थी, लेकिन सवाल उठता है कि यदि लंबे समय से यह कारोबार चल रहा था, तो प्रशासन ने क्यों नहीं कार्रवाई की?
अवैध शराब का नेटवर्क और पुलिस की जांच
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी ठेके पर 200 रुपये में जो शराब मिलती थी, उससे कहीं अधिक मात्रा में यह अवैध शराब इन ढाबों पर उपलब्ध थी। ग्रामीणों का कहना था कि शाम होते ही यहां इतनी भीड़ लगती थी जैसे कोई मेला हो। ढाबे की पड़ताल के बाद, गांव में कई जगहों पर शराब की खाली क्वार्टरें और ब्रांड की बोतलें देखी गईं। यह तस्वीर साफ कर रही थी कि इन ब्रांड की शराब की खपत बहुत अधिक थी। ग्रामीणों ने शिकायत भी की थी, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पुलिस का दावा है कि यूपी से शराब लाने का कनेक्शन सामने आया है, और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। जांच में यह भी पता चला है कि शराब कहां बनी, किसने पहुंचाई और किसने बेची, इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
मृतकों के परिजनों का दर्द और सरकार की कार्रवाई
सागर सर्किट हाउस पर स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान, यह जानकारी मिली कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतकों के शरीर में मेथेनॉल पाया गया है। यह बेहद जहरीला पदार्थ है, जो सामान्य एथेनॉल से अलग होता है और जानलेवा साबित हो सकता है। मंत्री ने बताया कि लालच में शराब में मेथेनॉल मिलाया गया, जिससे सस्ती शराब बनाई गई। करीब 2200 रुपये की कीमत वाली शराब की पेटी को लगभग 700 रुपये में तैयार करने का लालच इस मिलावट के पीछे था। इस लालच ने इंसानी जिंदगी को खतरे में डाल दिया। घटना के बाद, सरकार ने आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की है। कई अधिकारियों को निलंबित किया गया है, और जांच जारी है। सवाल यह है कि जब गांव में लंबे समय से अवैध शराब की शिकायतें हो रही थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सिस्टम ने आंखें बंद कर रखी थीं? या फिर पूरे नेटवर्क की जिम्मेदारी तय होगी? यह मामला सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि उन परिवारों का भी है, जिनके घरों से कमाने वाले बेटे चले गए। उन बच्चों का सवाल है, जिनके पिता अब कभी घर नहीं लौटेंगे। उन बहनों का सवाल है, जिन्होंने राखी बांधकर भाई की सलामती मांगी थी। यह सब सिस्टम की जिम्मेदारी है कि क्यों जहरीली शराब लोगों तक पहुंचने से पहले नहीं रोकी गई।









