मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से मौतों का मामला बढ़ता जा रहा है
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 12 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश में चिंता की लहर दौड़ा दी है। यह घटना पिछले महीने गुजरात (Gujarat) में हुई शराब त्रासदी से जुड़ी होने का आरोप लगाया जा रहा है। कांग्रेस (Congress) ने इस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि अवैध शराब का नेटवर्क दोनों राज्यों में सक्रिय है और शराब माफिया को संरक्षण प्राप्त है।
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच तेज
सागर जिले के बांदा तहसील के दो गांवों में जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 54 अन्य बीमार हो गए हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने FIR में नामजद 30 आरोपियों में से 14 को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ता पड़ोसी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से संभावित संबंधों की ओर संकेत कर रहे हैं, जहां से सस्ती शराब सीमा पार से रोजाना खरीदी जाती है।
राजनीतिक और पुलिस जांच की दिशा में बढ़ते कदम
उमंग सिंघार (Umang Singhar), विपक्ष के नेता, ने कहा कि गुजरात (Gujarat) के भावनगर (Bhavnagar) में जहरीली शराब त्रासदी में 13 लोगों की मौत के मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ही थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सागर में बेची गई जहरीली शराब पड़ोसी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से तस्करी कर लाई गई थी। सिंघार ने मांग की कि इस मामले की जांच में शराब नेटवर्क के पूरे जाल को खंगाला जाए, जिसमें शराब की सप्लाई, बॉटलिंग, लेबलिंग, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण शामिल हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश से आई शराब बिना किसी रोक-टोक के सागर पहुंच कैसे गई। साथ ही, उन्होंने ‘सागर गोल्ड’ नामक शराब ब्रांड की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसकी बोतलों पर DCR डिस्टिलरी (DCR Distillery) का पता लिखा है।









