हरियाणा में पुलिस विभाग पर उभरे सवाल
हरियाणा में आईपीएस पूरन सिंह और एएसआई संदीप लाठर की आत्महत्या के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एक ओर आईपीएस पूरन सिंह ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर एएसआई संदीप ने अपने सुसाइड नोट में उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी बताया है। इन घटनाओं ने पुलिस विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराब कारोबारी की एफआईआर और पुलिस की भूमिका
रोहतक के एक शराब व्यवसायी की एफआईआर ने इस पूरे मामले को नई दिशा दी है। इस एफआईआर में बताया गया है कि शराब ठेकेदारी का काम करने वाले इस व्यक्ति को कई बदमाशों ने फिरौती के लिए जान से मारने की धमकी दी है। इस कारण उसे पुलिस सुरक्षा प्राप्त है। आरोप है कि हिमांशु भाऊ गैंग के कई सदस्यों ने शराब के ठेकों में हिस्सा लिया है, जिससे उसे जान का खतरा बना रहता है।
गनमैन की गिरफ्तारी और आत्महत्या का सिलसिला
एफआईआर के आधार पर पुलिस ने 6 अक्टूबर को आईपीएस पूरन कुमार के गनमैन सुशील को गिरफ्तार किया। इसके तुरंत बाद, पूरन कुमार ने चंडीगढ़ में अपने घर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में संदीप लाठर भी शामिल था, जिसने अपने सुसाइड नोट और वीडियो में इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है।
संबंधित घटनाक्रम और आरोप
पूरन कुमार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें रिश्वतखोरी, यौन शोषण और यातना शामिल हैं। सुसाइड नोट में संदीप ने दावा किया है कि पूरन कुमार भ्रष्टाचार में लिप्त थे और डर के कारण उन्होंने आत्महत्या की। इस पूरे प्रकरण ने हरियाणा पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।











