गुना में राजनीतिक विवाद और भाषणों का तकरार
मध्य प्रदेश के गुना जिले में नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान राजनीतिक नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस कार्यक्रम में गुना के विधायक पन्नालाल शाक्य और चाचौड़ा विधायक प्रियंका मीना के बीच बहस छिड़ गई, जब शाक्य भाषण दे रहे थे। उसी समय प्रियंका मीना ने उन्हें बीच में रोकने का प्रयास किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
शाक्य ने अपने भाषण में कहा, “अभी मैं बोल रहा हूं, बीच में नहीं बोलना… चुप बैठो, मैं आपसे हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन करता हूं।” इसके जवाब में प्रियंका मीना ने उनके बयान पर आपत्ति जताई और नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने भी देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। इस विवाद के चलते मंच अचानक राजनीतिक अखाड़े में बदल गया।
रामायण और महाभारत के संदर्भ में विवादित बयान
गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपने भाषण में रामायण और महाभारत के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि “रामायण में रावण को समझाया गया कि पराई स्त्री को लाना मौत का सामान है। इस युद्ध में केवल पुरुष ही मरे, महिलाएं नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि महाभारत में भी ऐसा ही हुआ।
जब शाक्य अपने इस बयान को दे रहे थे, तभी चाचौड़ा विधायक प्रियंका मीना अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुईं और उनके कथनों का विरोध करने लगीं। इस पर शाक्य ने जवाब दिया कि उन्होंने कई किताबें पढ़ी हैं और उन्हें पता है कि इतिहास में क्या हुआ है। उन्होंने प्रियंका से बैठने का आग्रह भी किया।
मंच पर इस बहस के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव वर्चुअली जुड़े हुए थे। प्रियंका मीना ने अपने भाषण में शाक्य के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उन्होंने कहा कि विधायक की बातों से हम प्रभावित होते हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
इतिहास और वर्तमान में महिलाओं का संदर्भ
विधायक शाक्य ने अपने भाषण में कहा कि देश और समाज की वर्तमान परिस्थितियों को समझने की जरूरत है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण द्वारा सीता का हरण करने के बाद युद्ध में पुरुषों की ही मौत हुई। उन्होंने यह भी कहा कि रावण को उसके भाई समेत कई लोगों ने समझाया था कि पराई स्त्री लाना विनाश का कारण बन सकता है।
इसके साथ ही महाभारत का उल्लेख करते हुए शाक्य ने कहा कि पांचाली के कारण करोड़ों पुरुष मारे गए। उन्होंने पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता का भी उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि इन ऐतिहासिक घटनाओं को समझना जरूरी है, क्योंकि युद्धों में बड़ी संख्या में पुरुषों की जान गई। इस बीच, मंच पर मौजूद प्रियंका पैंची ने इन कथनों का विरोध किया और इसे महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक और महिला विरोधी टिप्पणी बताया।











