भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच का महत्त्वपूर्ण चरण
भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में अब न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे इस घटना की सच्चाई का पता लगाने की दिशा में कदम बढ़े हैं। परिवार का मानना है कि पुलिस की जांच से उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही है, इसलिए वे न्यायिक आयोग और अदालत से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। जब रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा बेलौटी गांव पहुंचे, तो परिजनों ने अपनी कई मुख्य मांगें रखीं। उनका विश्वास है कि निष्पक्ष जांच से भरत की मौत का असली कारण स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों की मुख्य मांगें और जांच की दिशा
भरत तिवारी के परिवार ने जांच आयोग के समक्ष यह मांग रखी है कि घटना में शामिल सभी पुलिसकर्मियों और संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जाए। उनका तर्क है कि इससे घटना से पहले और बाद की गतिविधियों का सही पता चल सकता है। साथ ही, परिवार ने भरत का मोबाइल फोन भी बरामद करने की अपील की है, क्योंकि उसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती हैं। भरत की मां आशा देवी ने भी न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
घटना से जुड़ी विवादित बातें और परिवार का आरोप
परिवार का आरोप है कि घटना से पहले भी पुलिस उनके घर पहुंची थी और भरत को धमकियां दी गई थीं। उनका सवाल है कि यदि भरत ने हथियार छोड़ दिए या सरेंडर कर दिया था, तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई? उन्होंने यह भी बताया कि घटना के आठ दिन बाद जब भोजपुर एसपी परिवार से मिलने आए, तो उन्होंने इस सवाल को उठाया। परिवार का दावा है कि भरत तिवारी अपराध की दुनिया में जन्म से नहीं था। वह बीएससी तक पढ़ाई कर चुका था और नौकरी की तैयारी कर रहा था। बाढ़ पीड़ितों और विस्थापितों की समस्याओं को लेकर उसकी आवाज उठाने के दौरान प्रशासन से विवाद हुआ, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे मार दिया जाए। यदि सभी तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड, घटनास्थल की जांच और संबंधित लोगों की भूमिका निष्पक्ष रूप से जानी जाए, तो पूरे मामले का सच सामने आ सकता है।











