मध्य प्रदेश में राजनीतिक संकट और न्यायिक कार्रवाई का मामला
मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित पूरी कैबिनेट को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ‘बड़बोले मंत्री’ को राजनीतिक संरक्षण दे रही है और सत्ताधारी पार्टी एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती को न्यायिक प्रक्रिया से बचाने का प्रयास कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और सरकार की अनदेखी
सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष की शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो हफ्ते के भीतर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी का निर्णय ले। हालांकि, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया, जबकि अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित है।
कैबिनेट में मंजूरी का प्रस्ताव नहीं आया और राजनीतिक सवाल
मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को पेश नहीं किया गया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी इस बात की पुष्टि की। जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की विशेष जांच दल (SIT) ने मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी है, जिससे सरकार का रुख देश के संवैधानिक ढांचे के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ विजय शाह के आचरण का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी का भी है। पटवारी ने मांग की कि मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट को तुरंत बर्खास्त कर दिया जाए।
उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे और राजनीतिक प्रभाव को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देंगे। राष्ट्रपति का कर्तव्य है कि वे संविधान, न्यायिक स्वतंत्रता और सेना के सम्मान की रक्षा करें, और देश की जनता उनसे उम्मीद करती है कि वे इन संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करेंगे।











