मध्य प्रदेश में दूषित पानी से मौतें: राजनीतिक विवाद और जिम्मेदारी का सवाल
मध्य प्रदेश की राजधानी इंदौर में हाल ही में हुई पानी की खराब गुणवत्ता से जुड़ी घटनाओं ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में लगातार दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे कई लोगों की जान गई है। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार ने नकली दस्तावेजों के आधार पर शहर को सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिलाया है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है।
इंदौर में पानी की गुणवत्ता और सरकार की नाकामी
डायरिया और उल्टी के प्रकोप के कारण इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में कई लोग बीमार पड़े, और इस स्थिति का कारण दूषित पानी को बताया गया। अधिकारियों ने बाद में खुलासा किया कि पानी की सप्लाई पाइपलाइन के ऊपर एक सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है, जिससे प्रदूषित पानी फैलने का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार को जिला प्रशासन ने 18 पीड़ितों के परिजनों को मुआवजे के चेक वितरित किए, जबकि आधिकारिक आंकड़ा केवल सात मौतों का ही था।
सफाई के दावों और वास्तविक स्थिति में फर्क
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर कहा कि सरकार के सफाई और विकास के दावे पूरी तरह फेल हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नलों से जहर बह रहा है और शहर की रैंकिंग में मिली खिताबें फर्जी हैं। सिंघार ने सवाल किया कि यदि शहर इतना साफ है, तो फिर नागरिकों को गंदे पानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अवॉर्ड हासिल किया है।
सिंघार ने यह भी कहा कि पूरे शहर में पानी की गुणवत्ता जांचने की जरूरत है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और इंदौर के मेयर से इस्तीफा मांगा जाए। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस पर ‘लाशों पर राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने तुरंत कदम उठाए हैं और स्थिति को सुधारने के लिए प्रयास जारी हैं।











