बिहार लोक सेवा आयोग ने AEDO परीक्षा रद्द के बाद सख्त कदम उठाए
बिहार लोक सेवा आयोग ने AEDO (सहायक शिक्षा विकास अधिकारी) परीक्षा रद्द होने के बाद अब परीक्षा आयोजन में शामिल एजेंसी साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है। आयोग ने इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और उसकी बैंक गारंटी भी जब्त कर ली है। यह निर्णय परीक्षा में हुई गड़बड़ी और कदाचार की जांच के बाद लिया गया है। जांच में प्रथम दृष्टया एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि हुई है। इसके बाद सरकार ने एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उसके जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर यह कदम उठाया गया। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। साथ ही, इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।
परीक्षा में मिलीभगत और नकल के प्रयासों की जांच
रिपोर्टों के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न जिलों में परीक्षा केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों ने ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य अनुचित साधनों का उपयोग कर नकल करने का प्रयास किया। इस संदर्भ में 32 अभ्यर्थियों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। आयोग ने कहा है कि मामले की जांच के दौरान किसी भी प्रश्नपत्र के लीक होने या वायरल होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी सीरीज का प्रश्नपत्र नहीं बरामद हुआ है, जिससे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें गलत साबित हुई हैं। इस संदर्भ में आयोग ने दो प्रमुख परीक्षाओं को निरस्त किया है। पहली, सहायक शिक्षा विकास अधिकारी की लिखित परीक्षा, जो 14 से 21 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित हुई थी, जिसमें लगभग 11 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। दूसरी, सहायक सार्वजनिक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन अधिकारी की परीक्षा, जो 23 अप्रैल 2026 को संपन्न हुई।
आयोग की कार्रवाई और भविष्य की योजनाएं
आयोग ने इन मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित करने के आरोप में 32 अभ्यर्थियों को आगामी परीक्षाओं से वंचित कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा की integrity को बनाए रखना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। साथ ही, इस पूरे प्रकरण के बाद परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है। इस तरह की कार्रवाई से परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा।










