मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका
मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक धक्का लगा है। पार्टी की उम्मीदवारी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच (स्क्रूटनी) के दौरान खारिज कर दिया गया है। इस निर्णय के साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला समाप्त हो गया है और भाजपा के महेश केवट का निर्विरोध चयन तय माना जा रहा है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र में आपराधिक मामले छुपाए हैं।
नामांकन रद्द होने का कारण और राजनीतिक प्रभाव
भाजपा नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में हैदराबाद (Hyderabad) की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी। इसी आधार पर उनके नामांकन को खारिज कर दिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति पर मीनाक्षी को मंगलवार शाम 6 बजे तक अपना पक्ष रखने का अवसर दिया, लेकिन उनके जवाब से संतुष्ट न होने पर नामांकन रद्द कर दिया गया।
राज्यसभा चुनाव की स्थिति और कांग्रेस का विरोध
मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है, साथ ही उनके पास 48 अतिरिक्त वोट भी हैं। वहीं कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं, लेकिन दो विधायक मतदान के पात्र नहीं हैं, जिससे उसकी प्रभावी संख्या 61 रह जाती है। इस स्थिति में तीसरी सीट का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के कारण यह सीट भी भाजपा की झोली में आ गई है।
कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। पार्टी का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उन्हें केवल एक सामान्य नोटिस मिला था, जिसमें कहा गया था कि उनके और अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये की कंपनसेशन की कार्यवाही क्यों न की जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उम्मीदवारों को केवल दर्ज मामलों की जानकारी देनी होती है, शिकायत या नोटिस को हलफनामे में घोषित करना जरूरी नहीं है। इसलिए, कांग्रेस का मानना है कि आरोप तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत हैं।











