हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई वाहन नियमावली लागू
हरियाणा सरकार ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में ‘हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993’ में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत अब गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे एनसीआर जिलों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों और ई-कॉमर्स फर्मों के वाहनों में नई पेट्रोल या डीजल गाड़ियों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सख्त नियमों के तहत स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों का प्रयोग अनिवार्य
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुरूप, हरियाणा सरकार ने यह निर्णय लिया है। 1 जनवरी 2026 से एनसीआर के सभी नए वाहनों में केवल CNG (Compressed Natural Gas), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी से चलने वाले वाहन (BOV) या किसी अन्य स्वच्छ ईंधन पर आधारित वाहन ही शामिल किए जाएंगे। मौजूदा बेड़े में भी नए तिपहिया ऑटो-रिक्शा और अन्य वाहनों को केवल CNG या इलेक्ट्रिक विकल्पों में ही जोड़ा जाएगा।
वाहनों के सुरक्षा और पारदर्शिता नियमों में हुआ सुधार
कैबिनेट ने हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1990 के नियम 86A को बदलते हुए ऐप-आधारित सेवाओं के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया है। इसके अंतर्गत यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 5 लाख रुपये का बीमा, ड्राइवरों के लिए भी कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और ऑनबोर्ड ड्राइवरों के लिए 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया है। साथ ही, सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और अग्निशामक यंत्र लगाना जरूरी होगा। यात्रियों की सहायता के लिए 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर की स्थापना भी अनिवार्य कर दी गई है।











