नई दिल्ली के ‘द ललित’ होटल का लाइसेंस विवाद कानूनी जटिलताओं में फंसा
नई दिल्ली के प्रसिद्ध ‘द ललित’ होटल से जुड़ा ₹1,063 करोड़ का लाइसेंस फीस विवाद अब एक नए और गंभीर मुकाम पर पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय राजधानी की नगरपालिका संस्था दिल्ली नगर निगम (NDMC) के निर्णय को सही ठहराते हुए, होटल के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया को वैध माना है।
संबंधित जमीन और लाइसेंस का इतिहास
यह विवाद मुख्य रूप से बाराखंभा लेन में स्थित 6.0485 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे भारत सरकार ने 1973 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NDMC) को सौंपा था। इसके बाद 1982 में NDMC और भारत होटल्स लिमिटेड के बीच 99 साल का लाइसेंस समझौता हुआ, जिसमें 5-स्टार होटल के निर्माण और संचालन की अनुमति दी गई थी। इस समझौते में 33 वर्षों के बाद लाइसेंस फीस में बदलाव का प्रावधान भी शामिल था। 13 फरवरी 2020 को NDMC ने इस संबंध में नोटिस जारी कर करीब ₹1,063.74 करोड़ की मांग की, जिसके न चुकाने पर लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस कदम को भारत होटल्स लिमिटेड ने अदालत में चुनौती दी।
कोर्ट का फैसला और आगे की राह
शुरुआती सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने भारत होटल्स लिमिटेड को राहत दी थी, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने NDMC के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1982 का समझौता एक लाइसेंस है, जो पारंपरिक अनुबंध नहीं है, इसलिए NDMC को इसे नियंत्रित करने और शर्तें लागू करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी माना कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से जुड़े कमर्शियल स्पेस में सब-लाइसेंसिंग गतिविधियां लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप नहीं थीं।
अब इस फैसले के बाद ₹1,063 करोड़ का बकाया राशि मान्य हो चुका है और लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। इस स्थिति में NDMC होटल से वसूली कर सकती है, होटल को सीज कर सकती है या जमीन का पुनः आवंटन कर सकती है। हालांकि, भारत होटल्स लिमिटेड के पास अभी भी सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प मौजूद है। यह मामला न केवल इस होटल के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि सरकारी जमीन पर निजी परियोजनाओं के मॉडल पर भी गहरा असर डाल सकता है।











