सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्यों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें तेजाब हमले के शिकार लोगों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान हो। यदि किसी कारणवश सरकारी रोजगार संभव नहीं है, तो उनके लिए जीवन यापन के लिए वित्तीय सहायता या गुजारा भत्ता की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
अदालत का निर्देश और पीड़ितों का पुनर्वास का प्रयास
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिए। अदालत ने पूछा कि क्यों अभी तक सरकारी विभागों और एजेंसियों में एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा गया है। यदि किसी राज्य को सरकारी नौकरी देने में लॉजिस्टिक या अन्य बाधाएं आती हैं, तो कम से कम उनके लिए आर्थिक सहायता की नीति जरूर बननी चाहिए, ताकि पीड़ितों को आर्थिक रूप से सहारा मिल सके।
पीड़ितों की याचिका और डिजिटल प्रक्रिया में कठिनाइयां
सुनवाई के दौरान पीड़िता शाहीन मलिक ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अपनी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा के माध्यम से कराना चाहती हैं। अदालत ने इस मामले को निःशुल्क (Pro Bono) आधार पर लेने का आग्रह भी स्वीकार किया। पीड़िता ने बताया कि एसिड अटैक के बाद बैंक खाता खोलने, आधार कार्ड बनवाने, संपत्ति का रजिस्ट्रेशन या मोबाइल सिम कार्ड लेने जैसी प्रक्रियाओं में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया में biometric verification जैसे कदम उनके लिए अक्सर असंभव हो जाते हैं। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश देने को कहा कि ऐसी प्रक्रिया को अधिक समावेशी और आसान बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जाए। सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।











