मध्य प्रदेश के रतलाम में शिक्षक तबादले का विरोध तेज
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में करीब 40 छात्र और उनके अभिभावक अपने शिक्षक बद्रीलाल राठौर के स्थानांतरण के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इन छात्रों ने स्कूल जाना पूरी तरह से छोड़ दिया है और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिक्षक की वापसी की मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक राठौर सर वापस नहीं आते, तब तक वे स्कूल नहीं जाएंगे। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि आठ दिनों के भीतर तबादला रद्द नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। प्रशासन ने इस मामले का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
छात्र और अभिभावकों का प्रदर्शन और बातचीत का प्रयास
प्रदर्शन के दौरान छात्र और उनके अभिभावक कलेक्टर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठ गए और जिला कलेक्टर मिशा सिंह से मिलने की मांग की। हालांकि, उनकी मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो सकी। बाद में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) ब्रजेंद्र रावत ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि आठ दिन के अंदर शिक्षक का तबादला रद्द नहीं किया गया, तो वे कार्यालय परिसर में तंबू लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। उनका तर्क है कि बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय वापस लिया जाना चाहिए।
शिक्षक ने अपने खर्च पर स्कूल में की सुविधाओं का विकास
ग्रामवासियों के अनुसार, शिक्षक बद्रीलाल राठौर ने अपने निजी संसाधनों से स्कूल में कई आवश्यक सुविधाएं विकसित की हैं। उन्होंने बच्चों की शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए हैं, जिससे गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में छात्रों की समझदारी में सुधार हुआ है। इस प्राथमिक स्कूल में लगभग 65 छात्र पढ़ते हैं और राठौर बच्चों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
शिक्षक ने बताया कि उनके क्लस्टर में कुल 75 शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन प्रशासनिक कारणों से उनका ही 30 जून को पिपलोदा क्षेत्र के सेमलिया गांव में तबादला कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे विभाग के आदेश का पालन कर रहे हैं, लेकिन बच्चों के प्रति उनके स्नेह को देखकर वे भावुक हो जाते हैं।
वहीं, एडीएम ब्रजेंद्र रावत ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई है। प्रशासन सभी पक्षों से बातचीत कर इस विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस संघर्ष का बच्चों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।










