मध्य प्रदेश में फर्जी शिक्षण संस्थानों का खुलासा
मध्य प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर जब से कागजी अस्पतालों और फर्जी नियुक्तियों का मामला सामने आया है। अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की भी जांच शुरू हुई है, जिसमें कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए हैं। राजधानी भोपाल में की गई पड़ताल में ऐसे बीएड कॉलेज पाए गए हैं, जो रिकॉर्ड में मौजूद हैं, लेकिन वास्तविकता में उनका कोई अस्तित्व नहीं है। कई स्थानों पर कॉलेज की जगह खाली खेत या बंद पड़े भवन मिले हैं, तो कहीं स्कूल और सोसायटी कार्यालय के बीच में बीएड कॉलेज चलाने का दावा किया गया है।
संबंधित कॉलेजों में मिली गंभीर कमियां और जांच का सच
मामले की जांच के दौरान भोपाल से करीब 35 किलोमीटर दूर विदिशा रोड पर स्थित मुगलिया कोट गांव का दौरा किया गया। यहां के खसरा नंबर 148/149/2/1 पर श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन संचालित होने का दावा था, लेकिन वहां केवल खाली खेत और चरती हुई भैंसें ही मिलीं। स्थानीय ग्रामीण खुमान सिंह लोधी ने बताया कि उन्होंने वर्षों से इस कॉलेज का नाम सुना है, लेकिन कभी भी वहां कोई छात्र या शिक्षण गतिविधि नहीं देखी। इसी खसरे में मिलेनियम कॉलेज और बगलामुखी कॉलेज का भी उल्लेख था, लेकिन बगलामुखी कॉलेज की इमारत वर्षों से बंद पड़ी मिली। भवन के पीछे का हिस्सा सिलाई और कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चल रहा था, जो कोविड के बाद से ही बंद पड़ा है।
शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की जांच और सरकार का कदम
भोपाल के बावड़िया कलां क्षेत्र में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। यहां सेवियर कॉलेज ऑफ एजुकेशन का परिसर मिला, जिसमें बीएड कॉलेज के साथ-साथ एक स्कूल और सोसायटी का कार्यालय भी संचालित था। विश्वविद्यालय की निरीक्षण रिपोर्ट में भी इन कमियों का उल्लेख था, लेकिन कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने सभी खामियों को दूर कर लिया है। उनका कहना है कि 7 जुलाई को दोबारा निरीक्षण में सभी मानकों का पालन पाया गया और कॉलेज को मान्यता भी मिल गई है।
बहरहाल, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के अधीन कुल 129 बीएड कॉलेज संचालित हैं, जिनमें से 127 निजी और दो सरकारी हैं। निरीक्षण के दौरान कई संस्थान तो अपने निर्धारित पते पर ही नहीं मिले, और कई में गंभीर कमियां पाई गईं। इन कमियों के बावजूद, 24 जून को हुई बैठक में 125 निजी बीएड कॉलेजों को नोटरीकृत हलफनामे के आधार पर संबद्धता दी गई। इन कॉलेजों से कहा गया कि वे शपथ पत्र दें कि वे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मानकों का पालन करते हैं, और यदि भविष्य में कोई कमी पाई जाती है तो उनकी संबद्धता तुरंत समाप्त की जा सकती है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि जांच में मिली कमियों को देखते हुए ही शपथ पत्र लेने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि फिर से जांच में कोई खामी पाई जाती है, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि विश्वविद्यालय स्तर पर सत्यापन में देरी हुई है, और भविष्य में समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, कांग्रेस ने इस पूरे मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों को अनुमति देने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। कांग्रेस ने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि असली स्थिति का पता चल सके और दोषियों को सजा मिल सके।











