किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का ऐतिहासिक समझौता
मंगलवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसमें किशाऊ परियोजना को लेकर कई राज्यों के बीच सहमति बनी। इस समझौते में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
राज्यों के प्रमुख नेताओं और अधिकारियों की भागीदारी
समझौते के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त केंद्र और संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह समझौता किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सभी का लाभ सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह सहमति केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और ‘टीम इंडिया’ की भावना का प्रतीक है।
प्रोजेक्ट का इतिहास और महत्व
किशाऊ परियोजना का इतिहास लगभग तीन दशक पुराना है। 12 मई 1994 को ऊपरी यमुना बेसिन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए एक समझौता हुआ था, जिसमें बेसिन में आने वाली हर जल संग्रहण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते की व्यवस्था की गई थी। इसी व्यवस्था के तहत किशाऊ परियोजना को विकसित करने का रास्ता निकला। हालांकि, तकनीकी, आर्थिक और राज्यों के बीच मतभेदों के कारण यह परियोजना वर्षों तक लंबित रही। लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं से जुड़े विवादों के समाधान के बाद ही किशाऊ परियोजना पर सहमति बन सकी। 2019 में इन विवादों के सुलझने के बाद केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत तेज हुई, और 16 जून को औपचारिक सहमति बन गई। अब सभी राज्यों के हस्ताक्षर के साथ यह परियोजना निर्णायक रूप से आगे बढ़ने लगी है।










