मध्य प्रदेश में जहरीली शराब त्रासदी पर NHRC की कार्रवाई
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एक टीम ने मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुई जहरीली शराब की घटना के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस घटना में कई लोगों की जान गई है और कई घायल हैं। NHRC की टीम ने पीड़ितों के परिजनों से तुरंत बयान दर्ज करने का भी आग्रह किया, क्योंकि कुछ ने शिकायत की थी कि अभी तक उनके बयान नहीं लिए गए हैं।
पुलिस की लापरवाही और आरोपी की गिरफ्तारी
बांदा तहसील में जहरीली शराब पीने से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 30 में से 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत राजपूत अभी भी फरार है। NHRC की टीम ने पुलिस की कार्यवाही पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुलिस ने न तो शराब विक्रेताओं के बयान लिए हैं और न ही कोई कार्रवाई की है।
सरकारी दुकानों से खरीदी गई शराब और आगे की कार्रवाई
NHRC सदस्य ने यह भी बताया कि जिन शराब से मौतें हुई हैं, वे सरकारी लाइसेंस वाली दुकानों से खरीदी गई थीं। इस घटना के बाद पुलिस ने जिले में सभी शराब विक्रेताओं की सूची बनाने और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुलिस की लापरवाही पर भी नाराजगी व्यक्त की गई है। मध्य प्रदेश के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर मुआवजे का आश्वासन दिया है।










