दिल्ली आबकारी नीति मामले में जज की महत्वपूर्ण भूमिका
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जितेंद्र प्रताप सिंह ने हाल ही में आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी (AAP) नेता मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त करने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले भी वे कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई कर चुके हैं।
प्रसिद्ध मामलों में उनकी भूमिका और न्यायिक अनुभव
जितेंद्र प्रताप सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं और अक्टूबर 2024 में एडिशनल सेशन जज के रूप में नियुक्त हुए। उन्हें जटिल भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों को संभालने में विशेष विशेषज्ञता प्राप्त है। उन्होंने कई राजनीतिक और सामाजिक विवादित मामलों में अपने निर्णय से अपनी न्यायिक योग्यता का प्रदर्शन किया है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले किए गए विवादास्पद ट्वीट्स के मामले में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा की याचिका को खारिज किया था।
उनकी न्यायिक निर्णय और विवादित मामलों का इतिहास
जज जितेंद्र प्रताप सिंह ने अमानतुल्लाह खान को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में नवंबर 2024 में रिहा करने का आदेश भी दिया था। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमे की शिकायत को खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ आपराधिक न्यास भंग के मामले में पर्याप्त आधार मौजूद हैं। वर्तमान में, उन्होंने आबकारी नीति मामले में अभियोजन पक्ष की कमजोर स्थिति को देखते हुए आरोपमुक्ति का फैसला सुनाया है, जिसे अब दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।











