जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी और जमानत प्रक्रिया
जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर नाबालिग के पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की है। इस आदेश को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरव प्रताप सिंह लालर ने सुनवाई के बाद जारी किया। इस मामले में स्वतंत्र पर मारपीट, एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट और पॉक्सो (POCSO) से संबंधित कई मामले दर्ज हैं।
गिरफ्तारी के बाद कोर्ट का निर्णय और हाई कोर्ट की भूमिका
इससे पहले, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को आपत्तिजनक बयान देने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान नाबालिग के पिता के साथ मारपीट के आरोप में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। वहीं, स्वतंत्र की गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हेबियस कॉर्पस (BHS) याचिका पर भी सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और मामले की सुनवाई आज ही तय की गई। हेबियस कॉर्पस का अर्थ है कि जब किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का आरोप हो, तो अदालत से उसकी रिहाई की मांग की जाती है।
गिरफ्तारी का कारण और संबंधित आरोप
स्वतंत्र भारद्वाज को 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), POCSO और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपों में नाबालिग से यौन उत्पीड़न, पीछा करना, धमकाना और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल थीं। यह मामला तब चर्चा में आया जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने नाबालिग के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की।










