धार की विवादित भोजशाला का कानूनी संघर्ष और मध्य प्रदेश सरकार का रुख
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश सरकार ने अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के समक्ष एडवोकेट जनरल (AG) प्रशांत सिंह ने मुस्लिम पक्ष द्वारा प्रस्तुत 91 साल पुराने दस्तावेजों की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मामले में सरकार का मानना है कि इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और कानूनी मान्यता संदिग्ध है।
मुस्लिम पक्ष का दावा और ऐतिहासिक आदेश का संदर्भ
मुस्लिम समुदाय ने तर्क दिया है कि तत्कालीन धार रियासत के 1935 के आदेश का हवाला देते हुए यह दावा किया गया है कि भोजशाला को एक मस्जिद घोषित किया गया था और उसमें नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। इस ऐतिहासिक आदेश का उपयोग कर मुस्लिम पक्ष ने अपने अधिकारों का समर्थन करने का प्रयास किया है।
एडवोकेट जनरल का तर्क और विवादित आदेश की वैधता
प्रशांत सिंह ने 24 अगस्त 1935 को धार रियासत के दीवान नाडकर द्वारा जारी किए गए ‘ऐलान’ की कानूनी वैधता को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि यह आदेश किसी विधायी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था और इसलिए इसे कानून नहीं माना जा सकता। सिंह ने यह भी कहा कि यह आदेश एक वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने आगे बताया कि यह आदेश उस समय जारी किया गया था जब विवादित स्मारक के नामकरण को लेकर शहर में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विवादित स्थल का नाम लंबे समय से भोजशाला रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने पहले ‘कमाल मौला मस्जिद’ नाम जोड़ने का प्रयास किया।
एडवोकेट जनरल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के अवशेष पाए गए हैं और यह स्थल परमार राजाओं के शासनकाल से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले का भी जिक्र किया और हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच करे।
विवादित स्थल पर हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला मस्जिद कहता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है और हाई कोर्ट 6 अप्रैल से इस स्थल के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे पांच याचिकाओं और एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है।









