भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का नया अध्याय शुरू
भारत और रूस अब अपनी रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में अग्रसर हैं। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले 11 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात तय है। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के अगले चरण की डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल के विकास पर चर्चा होगी। 12-13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना है।
संबंधित रक्षा समझौते और तकनीकी प्रगति पर चर्चा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि रूस अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम है और इन पर अमल किया जाएगा। भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच S-400 ट्रायम्फ रेजिमेंट के लिए 5.43 अरब डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) का समझौता किया था। इनमें से चार रेजिमेंट पहले ही भारत को मिल चुकी हैं और वे तैनात हैं। इनमें से तीन पंजाब, राजस्थान और जम्मू सेक्टर में पाकिस्तान के खिलाफ तैनात हैं, जबकि एक स्क्वाड्रन चीन के खिलाफ उत्तर भारत में तैनात है।
आधुनिक हथियारों का विकास और संयुक्त उत्पादन योजनाएं
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर दुश्मन की मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर इतिहास रच दिया। इस एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के AEW&C विमान को नष्ट कर उसकी हवाई बढ़त को खत्म कर दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी हुई है, जो अब नवंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस मिसाइलों ने भी ऑपरेशन सिंदूर में अद्भुत प्रदर्शन किया। पेस्कोव ने कहा कि रूस और भारत मिलकर ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी का विकास कर रहे हैं। नई ब्रह्मोस-NG हल्की (1.3 टन) और छोटी है, जिसकी गति Mach 3.5 है और इसकी रेंज 400 से 800 किलोमीटर के बीच है। इसे तेजस और MiG-29 जैसे फाइटर जेट से लॉन्च किया जा सकता है। वर्तमान में, Su-30MKI पर एक मिसाइल ही लगाई जा सकती है, लेकिन नई पीढ़ी की मिसाइलें कई मिसाइलें एक साथ ले जाने में सक्षम होंगी।
रूस के साथ इस मिसाइल का संयुक्त उत्पादन भी चर्चा का विषय है। इसकी रेंज पहले ही 450 किलोमीटर से अधिक हो चुकी है और अब इसे 800 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस वर्जन का इस्तेमाल पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला करने के लिए किया गया था।
भारत की हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी अब 40 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 51 प्रतिशत थी। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर में रूस के प्रदर्शन को देखते हुए मॉस्को अब सिर्फ खरीदार-विक्रेता के रिश्ते से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान, विकास, सह-उत्पादन और तीसरे देशों को निर्यात की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल खरीद चुका है, और कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश भी इसे खरीदने की कतार में हैं।










