दिल्ली में जलभराव से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार
दिल्ली सरकार ने मानसून से पहले ही शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 169 प्रमुख स्थानों की पहचान की है, जिनमें प्रगति टनल, मिंटो ब्रिज और कई महत्वपूर्ण अंडरपास शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पंप, कंट्रोल पोस्ट और निगरानी प्रणालियों का प्रबंध किया है। यह कदम शहर में जलभराव की समस्या को कम करने और यातायात बाधाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिकृत और अनधिकृत क्षेत्रों में निगरानी का दायरा बढ़ाया गया
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, केवल 169 जलभराव संभावित स्थानों पर ही निगरानी नहीं रखी जा रही है, बल्कि ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के आधार पर 2023, 2024 और 2025 के दौरान कुल 445 संभावित जलभराव स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। इन सभी क्षेत्रों की सतत निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति का तुरंत समाधान किया जा सके। राजधानी के आईटीओ क्षेत्र, दिल्ली सचिवालय, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम जैसे संवेदनशील इलाकों के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी मुख्यालय, पुराने पुलिस मुख्यालय, राजघाट चौराहा, बहादुर शाह जफर मार्ग और इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन के आसपास के क्षेत्र भी जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
यमुना नदी और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर विशेष ध्यान
यमुना नदी के जलस्तर पर नजर रखने के लिए सरकार ने फ्लड कंट्रोल ऑर्डर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जैसे ही हथिनी कुंड बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जाएगा, तुरंत ही बाढ़ चेतावनी जारी की जाएगी। इसके बाद संबंधित सेक्टर कंट्रोल रूम सक्रिय होकर अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी शुरू कर देंगे। सरकार ने यमुना का चेतावनी स्तर 204.50 मीटर, खतरे का स्तर 205.33 मीटर और निकासी का स्तर 206 मीटर निर्धारित किया है। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 11 रेगुलेटर ड्रेन का संचालन किया जाएगा, जिनके माध्यम से पानी को नियंत्रित तरीके से नदी में छोड़ा जाएगा। साथ ही, 16 फ्लड कंट्रोल पोस्ट और आठ तटबंध भी स्थापित किए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। सेना की मदद से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य भी तेजी से किए जाएंगे, जिसमें नौकाओं का उपयोग भी शामिल है।











