दरभंगा मेडिकल कॉलेज में छात्र का मोबाइल टावर पर प्रदर्शन
दरभंगा (Darbhanga) के मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) परिसर में बुधवार को अचानक तनाव का माहौल बन गया, जब बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing) के एक छात्र ने परीक्षा में भाग लेने से इनकार करने पर गुस्सा जाहिर किया। छात्र ने नाराजगी में अस्पताल के पास लगे एक मोबाइल टावर पर चढ़कर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे कॉलेज और अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल फैल गया।
पुलिस और कॉलेज प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
जैसे ही घटना की जानकारी मिली, स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की टीम और कॉलेज प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंच गए। छात्र को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए उसके सहपाठियों, कॉलेज अधिकारियों और प्रिंसिपल ने लगातार समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़ा रहा।
छात्र का आरोप और पुलिस जांच का आश्वासन
करीब चार घंटे चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के दौरान छात्र ने आरोप लगाया कि उसे जानबूझकर परीक्षा में बैठने से रोका गया है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ भावना भारती को निलंबित करने की भी मांग की। घटना के दौरान, कॉलेज प्रशासन और अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्र से बातचीत जारी रखी और भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि जांच में छात्र के आरोप सही पाए गए, तो उसे परीक्षा में भाग लेने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद छात्र ने मोबाइल टावर से सुरक्षित नीचे उतरकर राहत की सांस ली।
छात्र ने अपने बयान में कहा कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जानबूझकर परीक्षा से वंचित किया गया। उसने यह भी दावा किया कि वह पहले ही अपनी गलती के लिए लिखित माफी मांग चुका था, फिर भी उसे परीक्षा से बाहर रखा गया। छात्र का मानना है कि उसकी उम्मीदें धूमिल हो गई हैं और वह भविष्य के प्रति निराश है।
मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम को देखा और पुलिस तथा फायर ब्रिगेड की टीम किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रही।
प्रिंसिपल और अधीक्षक का क्या कहना है?
प्रिंसिपल डॉ भावना भारती ने छात्र के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह कॉलेज के नियमों का उल्लंघन कर रहा था। उसे सुधारने के लिए सख्त कदम उठाए गए थे और परीक्षा में भाग लेने से पहले उसे चेतावनी दी गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि छात्र को परीक्षा में शामिल होने से रोका गया था, लेकिन यह निर्णय अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया था।
वहीं, कॉलेज के अधीक्षक डॉ जगदीश चंद्र ने कहा कि छात्र की कई मांगें थीं, जिनमें प्रिंसिपल को निलंबित करने और परीक्षा में शामिल करने की भी मांग शामिल थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उचित निर्णय लेने के बाद ही छात्र को परीक्षा में भाग लेने का मौका मिलेगा।









