डिजिटल ठगी पर सरकार का बड़ा कदम: साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई
देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के मामलों को रोकने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत पिछले कुछ महीनों में 83,000 से अधिक वॉट्सएप खातों और 3,900 स्काइप आईडी को ब्लॉक किया गया है। ये सभी खातें डिजिटल धोखाधड़ी और निवेश से जुड़ी जालसाजी के अपराधों में इस्तेमाल हो रहे थे। साथ ही करीब 8.45 लाख सिम कार्ड और 2.39 लाख मोबाइल IMEI नंबर भी बंद कर दिए गए हैं, ताकि अपराधी फिर से नेटवर्क का दुरुपयोग न कर सकें।
साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में मिली सफलता
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आजकल साइबर अपराधी फोन और मैसेज के माध्यम से लोगों को डराकर या लालच देकर ठगी कर रहे हैं। कई मामलों में खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया जाता है। सरकार की इस सख्त कार्रवाई से भारत के डिजिटल सिस्टम से हजारों विदेशी अपराधियों का संपर्क टूट गया है, जिससे साइबर अपराध का बड़ा नेटवर्क कमजोर पड़ा है। इससे आम नागरिकों को भी राहत मिली है और उनके वित्तीय नुकसान को रोकने में मदद मिली है।
साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए सरकार की चेतावनी और जागरूकता अभियान
गृह मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अधिकतर पीड़ित वरिष्ठ नागरिक होते हैं, जिनकी संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। 2025 में हुए कई घोटालों में पाया गया है कि अपराधी मुख्य रूप से तकनीकी रूप से कम जानकार बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं, और उनकी बचत मिनटों में हड़प लेते हैं। हाल ही में गृह मंत्रालय के 14C विंग ने एक अलर्ट जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि साइबर ठग सीनियर सिटीजन को डिजिटल अरेस्ट के जरिए फंसाते हैं और इसके लिए इंक्रिप्टेड सिग्नल ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अपराधी पहले सामान्य फोन और व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल अरेस्ट करते हैं, फिर उन्हें सिग्नल ऐप में ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पीड़ित को डराया जाता है कि यदि वह सिग्नल ऐप में जाएगा, तो उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
इसी कारण पिछले दिनों में ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि साइबर ठग सीनियर सिटीजन को निशाना बनाकर डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं। गृह मंत्रालय ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति सिग्नल ऐप के जरिए किसी को डिजिटल अरेस्ट करता है, तो वह फर्जी है और इससे बचना चाहिए। साइबर फ्रॉड की रोकथाम के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का I4C और राज्य स्तर की साइबर पुलिस लगातार काम कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर दिन 7000 से अधिक कंप्लेंट्स मिलती हैं, जिनमें से लगभग 6000 का समाधान किया जाता है। इन मामलों में हर घंटे करीब 1.5 करोड़ रुपये साइबर अपराधी अपने खातों से उड़ा लेते हैं, जिनमें से केवल 8 करोड़ रुपये ही वापस मिल पाते हैं।
साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में अभी भी बुजुर्गों को निशाना बनाकर जालसाजी की जा रही है। इसी कारण से लगातार वॉट्सऐप अकाउंट और स्काइप आईडी को ब्लॉक किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि फेक आईडी बनाकर साइबर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, MHA साइबर विंग ने जागरूकता अभियान चलाया है कि यदि कोई साइबर फ्रॉड का शिकार हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें ताकि पीड़ित का पैसा गोल्डन आवर में सुरक्षित किया जा सके।











