मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर खामियां
मुजफ्फरपुर के प्रमुख सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। विशेष रूप से पैथोलॉजी विभाग में आवश्यक केमिकल की अनुपस्थिति के कारण 15 फरवरी से ब्लड संबंधित जांच पूरी तरह से बंद हो चुकी है। इस स्थिति में हर दिन 150 से 250 मरीज बिना जांच कराए ही अस्पताल छोड़ने को मजबूर हैं।
मॉडल अस्पताल की हकीकत और जांच सुविधाओं का संकट
14 मई 2025 को 29 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित तीन मंजिला, 100-बेड वाले इस मॉडल अस्पताल का उद्घाटन हुआ था। इसमें ओपीडी, पंजीकरण कक्ष, पैथोलॉजी, एक्स-रे और दवा वितरण केंद्र जैसी सुविधाओं का दावा किया गया था। लेकिन वर्तमान में इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि अस्पताल की बुनियादी जांच सेवाएं भी ठप पड़ी हैं।
ग्रामीण मरीजों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
जिले के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए इस अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में भी जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। CBC केमिकल की अनुपस्थिति के कारण ब्लड जांच नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज बिना जांच के ही वापस लौट रहे हैं।
अहियापुर की विवेकिया देवी ने बताया कि उनके हाथ में कई दिनों से घाव है और तेज दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने ब्लड जांच का निर्देश दिया, लेकिन पैथोलॉजी विभाग ने बताया कि केमिकल उपलब्ध नहीं है, इसलिए जांच संभव नहीं है। इसी तरह सकरा गांव की राधा देवी भी पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचीं, लेकिन उन्हें भी यही जवाब मिला।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पिछले दो सप्ताह से हर दिन सौ से अधिक मरीज CBC केमिकल की कमी के कारण वापस लौट रहे हैं। इस समस्या की जानकारी अस्पताल प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। जैसे ही केमिकल उपलब्ध होगा, जांच शुरू कर दी जाएगी।
यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है, खासकर उस समय जब सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर भारी खर्च का दावा कर रही है। लगभग 30 करोड़ की लागत से बने इस अस्पताल में सुविधाओं का दावा तो किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में मरीजों को बुनियादी ब्लड जांच तक नहीं मिल पा रही है।










