सियासी हलचल तेज, टीएमसी सांसद की मुलाकात से आशंकाएं बढ़ीं
दिल्ली में टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक माहौल में नई गर्माहट ला दी है। इस बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बंद्योपाध्याय भी पार्टी के बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। पार्टी के अंदर चल रहे घमासान के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि इस कदम का क्या असर आगामी चुनावी राजनीति पर पड़ेगा।
बागी सांसदों का समर्थन और राजनीतिक संकेत
बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को दावा किया कि पार्टी के 28 लोकसभा सदस्यों में से 19 सदस्य पहले से ही इस बागी गुट का समर्थन कर रहे हैं। खबरों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष ने घोषणा की है कि मान्यता मिलने के बाद यह गुट संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को समर्थन देगा। यह संकेत इस बात का संकेत है कि बंगाल की राजनीति में नई समीकरण बन सकते हैं।
टीएमसी का विरोध और भविष्य की राजनीति
संबंधित खबरों के अनुसार, सुदीप बंद्योपाध्याय को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में माना जाता है और उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व व दिल्ली के राजनीतिक हलकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता रहा है। उनके और बीजेपी के किसी भी उच्च स्तरीय रणनीतिकार के बीच संभावित बातचीत का राजनीतिक विश्लेषक बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं, खासकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के भविष्य को लेकर।
वहीं, बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों का एक समूह पहले ही पार्टी से अलग हो चुका है और उसने स्पीकर रथिंद्र बोस से मान्यता प्राप्त कर ली है, जिसमें बागी गुट के नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है। इस मान्यता को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, और कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है।
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोलकाता उत्तर के सांसद की सत्ता और पद की लालसा के कारण ही पार्टी ने कई महत्वपूर्ण नेताओं को बीजेपी के हाथों गंवा दिया है। यह राजनीतिक घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में नई उथल-पुथल का संकेत है।










