NEET UG 2026 परीक्षा विवाद और छात्रों पर प्रभाव
देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के कारण परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है। इस स्थिति का सबसे बड़ा असर केवल परीक्षा के पुनः आयोजन पर ही नहीं, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों पर बढ़ते आर्थिक और मानसिक दबाव पर भी पड़ा है। वर्तमान में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा हो गया है। पिछले तीन वर्षों में दो बार NEET पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर कमजोर होता जा रहा है।
सिस्टम की खामियों का खामियाजा छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि सिस्टम की गलतियों का खामियाजा आखिरकार छात्रों और उनके परिवारों को ही क्यों भुगतना पड़ता है। गलती किसकी है और सजा किसे मिलनी चाहिए? छात्रों का कहना है कि यदि सुरक्षा एजेंसियां और परीक्षा प्रणाली पेपर को सुरक्षित नहीं रख पा रही हैं, तो फिर हर बार छात्रों और उनके परिवारों को ही क्यों कीमत चुकानी पड़ती है? छोटे शहरों से भोपाल जैसे बड़े शहरों में अपने सपनों को पूरा करने आए छात्रों को NEET परीक्षा के लीक होने के बाद कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा है, क्योंकि उनके सपने अधूरे रह जाने का डर सता रहा है। यह RE-NEET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनकर टूट रही है।
छात्रों और परिवारों का अनुभव और बढ़ते खर्च
छात्र और उनके परिवार बताते हैं कि वे लाखों रुपये खर्च कर अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर भेजते हैं ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें। लेकिन सिस्टम की खामियों के कारण हर बार उन्हें नई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भोपाल जैसे शहर में रहकर पिछले तीन वर्षों से NEET की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद ही उन्हें हॉस्टल और कोचिंग सेंटर खाली कर अपने घर लौटना पड़ा था। लेकिन जैसे ही एनटीए ने परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया, उन्हें फिर से कोचिंग और हॉस्टल बुकिंग के लिए फोन करना पड़ा। अब पुनः परीक्षा की घोषणा के बाद उन्हें फिर से वापस आना पड़ रहा है।
खंडवा की रहने वाली NEET छात्रा प्रिया ने बताया कि उनके पिता पेंटर हैं और परिवार पहले ही कोचिंग फीस और रहने के खर्च के लिए कर्ज ले चुका है। RE-NEET के कारण बढ़े हुए खर्च ने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी है। प्रिया का कहना है कि अब उनकी सबसे बड़ी लड़ाई किताबों से नहीं, बल्कि सिस्टम से है।
इसी तरह खुरई-सागर की छात्रा कार्तिका, जो NEET की तैयारी कर रही थीं, का कहना है कि वे पिछले दो साल से हॉस्टल में रहकर कठिन मेहनत कर रही थीं। परीक्षा खत्म होने के बाद वे घर चली गई थीं, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर मिलते ही उन्हें फिर से भोपाल लौटना पड़ा। उनका कहना है कि दो साल में हॉस्टल, खाने और रोजाना बस से आने-जाने का खर्च पहले ही परिवार पर बोझ था, और अब परीक्षा रद्द होने के बाद तनाव और भी बढ़ गया है।
कोचिंग संस्थानों का दावा और परीक्षा की तैयारी
कोचिंग संस्थान का कहना है कि RE-NEET परीक्षा देने वाले छात्रों से अतिरिक्त पढ़ाई का कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। उनका दावा है कि छात्रों की तैयारी अभी भी मजबूत है। NEET की पढ़ाई कराने वाले विशेषज्ञ का कहना है कि परीक्षा को अभी केवल नौ दिन हुए हैं, इसलिए छात्रों का लय पूरी तरह से नहीं टूटा है। वहीं हॉस्टल संचालक बताते हैं कि जब रूम खाली होने का समय आता है, तो एक महीने पहले ही उसकी पूछताछ शुरू हो जाती है और अगले ही दिन रूम किराए पर दे दिया जाता है। भोपाल जैसे शहर में बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं, इसलिए कमरे लंबे समय तक खाली नहीं रहते।









