दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध प्रदर्शनों पर सुनवाई आज
शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय जंतर-मंतर और राजधानी में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के नियमन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रदर्शन के नियम स्पष्ट नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट के अमित साहनी फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
व्यवसायिक समय में प्रदर्शन की अनुमति की मांग
अक्टूबर से फरवरी का समय व्यापार के लिहाज से सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया है कि उन्हें लंबित मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए। उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में आवश्यक कदम उठाएं और अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।
संबंधित मुद्दों और याचिकाओं पर विचार
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह उन मामलों को अपने दायरे में नहीं लेना चाहता जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि ये याचिकाएं विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक सड़कों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के अमित साहनी फैसले पर आधारित हैं। साथ ही, एनएसयूआई और अंशिका त्रिपाठी की याचिकाओं पर भी सुनवाई हो रही है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की जांच की मांग की गई है।
अदालत ने यह भी जानकारी मांगी कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या कार्रवाई हुई है, जिस पर वकीलों ने बताया कि गुरुवार को इस मामले की सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने प्रदर्शन स्थल में घुसकर मारपीट की और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और हलफनामे में संशोधन की अनुमति की भी मांग की है।









