लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने का आदेश विवाद का कारण बन गया है
लुटियंस दिल्ली में स्थित प्रसिद्ध दिल्ली जिमखाना क्लब को सरकार की ओर से खाली करने का नोटिस जारी होने से विवाद गहरा गया है। केंद्र सरकार ने इस क्लब को 5 जून तक पूरी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का निर्देश दिया है, जिससे क्लब के सदस्य असंतुष्ट हैं। इस आदेश के खिलाफ अब सदस्य सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की योजना बना रहे हैं। रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और कानूनी कार्रवाई का समर्थन किया गया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन भी शुरू किया गया है।
क्लब के सदस्यों ने कानूनी लड़ाई का लिया फैसला
क्लब के वरिष्ठ सदस्य ब्रिगेडियर हरिंदर पाल बेदी ने बताया कि कई सदस्यों ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी जारी है और अधिक सदस्य भी इसमें शामिल हो रहे हैं। सदस्यों का मानना है कि यह फैसला उनके लिए चौंकाने वाला है, क्योंकि यह स्थल दशकों से उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत यादों का हिस्सा रहा है। सदस्यों का कहना है कि वे इस सरकारी आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देंगे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सोमवार को कोर्ट में याचिका दाखिल करने की योजना है।
सरकार का तर्क और क्लब का ऐतिहासिक महत्व
सरकार का तर्क है कि यह जमीन रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए जरूरी है। यह इलाका लुटियंस दिल्ली (Lutyens Delhi) में स्थित है और प्रधानमंत्री आवास के नजदीक है। आदेश के अनुसार, 5 जून को पूरी जमीन और भवन सरकार को सौंप दिए जाएंगे। दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना वर्ष 1913 में ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदल दिया गया, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान और महत्व आज भी बना हुआ है। क्लब से जुड़े पूर्व राष्ट्रपति, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनेता और अधिकारी इसकी विरासत का हिस्सा रहे हैं।









