बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास बाघ का रिहायशी इलाके में प्रवेश
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) के समीप स्थित पनपथा गांव के खेरवा टोला में रविवार तड़के लगभग तीन बजे एक बाघ ने अचानक रिहायशी क्षेत्र में प्रवेश कर लिया। इस खौफनाक घटना में बाघ ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिसमें फूल बाई पाल (40 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में तीन अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
बाघ के शव की जांच और अधिकारियों का बयान
फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के अनुसार, बाघ के हमले के बाद वह मृतिका के घर के अंदर ही घुस गया। जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइजर का इस्तेमाल किया, तो बाघ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जांच में पता चला कि बाघ पहले ही मृत हो चुका था। अधिकारियों ने इस संदिग्ध मौत के पीछे ‘ओवरडोज’ का आरोप लगाने से इनकार किया है।
ग्रामीणों का गुस्सा और वन विभाग पर हमला
बाघ के बार-बार होने वाले हमलों से नाराज ग्रामीणों का धैर्य टूट गया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने वन रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव को निशाना बनाते हुए उन्हें घायल कर दिया। साथ ही, एक महिला वन कर्मचारी के साथ भी हाथापाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि मदद के लिए कई बार फोन करने के बावजूद अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे, जिससे बचाव अभियान में देरी हुई। इसके कारण ग्रामीणों ने लगभग दो घंटे तक महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से इनकार किया।
बाघ की संदिग्ध मौत को देखते हुए प्रशासन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत कड़े कदम उठाए हैं। बाघ का शव एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर (SWFH Jabalpur) के डीप फ्रिज में सुरक्षित रखा गया है। दिल्ली और नागपुर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन पशु चिकित्सकों की टीम फिर से शव का परीक्षण करेगी, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया और राहत राशि की घोषणा की। मृतका फूल बाई पाल के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, घायलों का मुफ्त इलाज किया जाएगा और अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये का खर्च दिया जाएगा। इस घटना के मद्देनजर गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
यह घटना मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिसमें हाल ही में महाराष्ट्र के चंद्रपुर में भी बाघ के हमले में चार महिलाओं की मौत हो चुकी है। बांधवगढ़ में हुई यह घटना वन्यजीव प्रबंधन और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच बढ़ती खाई का संकेत है।











