मुगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
मुगेर जिले में गंगा नदी का जलस्तर अब खतरे के स्तर से नौ सेंटीमीटर अधिक पहुंच चुका है। इस बढ़ते जलस्तर के कारण छह प्रखंडों के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई घरों में पांच फीट तक पानी भर चुका है, जिससे ग्रामीण नाव का सहारा लेकर आवाजाही कर रहे हैं। साथ ही, फसलों का डूबना और घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
बाढ़ का प्रभाव और ग्रामीणों की स्थिति
हवेली खड़गपुर प्रखंड के तेलियाडीह, अग्रहण और बहिरा पंचायत में भी पानी फैलने लगा है। सठबिग्घी गांव की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है, जहां चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। कई मकान डूब चुके हैं और घरों के बाहर पांच फीट या उससे अधिक पानी जमा है। ग्रामीण सड़कें भी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे आवागमन बाधित हो गया है।
सठबिग्घी के ग्रामीणों के अनुसार हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार जल प्रवाह बहुत तेज है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे खतरा और भी बढ़ गया है। सड़कें डूबने के कारण ग्रामीणों ने नाव जैसी थर्माकोल की नावें बना ली हैं, जिनके माध्यम से आवश्यक कार्यों के लिए आवाजाही कर रहे हैं।
बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर गया है और फसलें डूब चुकी हैं। कई परिवार अपने घर और सामान को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कुछ लोग पहले ही ऊंचे स्थानों पर शरण ले चुके हैं, जबकि कई ग्रामीण परिवार और उनके मवेशी अभी भी घरों में बने मचान पर रहने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक प्रयास और प्रभावित लोगों की मांग
आजतक से बातचीत में बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से तुरंत नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो घरों से बाहर निकलना और भी कठिन हो जाएगा। सड़कें पूरी तरह से जलमग्न होने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सामान के साथ आवाजाही करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि उन्हें जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए।
गंगा की तेज धार और जल का दबाव सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत के वार्ड नंबर 2 और 3 को जोड़ने वाली सड़क टूट गई है, जिससे दोनों वार्डों के बीच आवागमन बंद हो गया है। जिला प्रशासन ने इस स्थिति को देखते हुए गुरुवार से ही कटावरोधी कार्य शुरू कर दिए हैं।
जाफरनगर पंचायत के वार्ड नंबर 4 और 5 में भी कटाव की स्थिति बनी हुई है, और प्रशासन की ओर से वहां भी सुरक्षा कार्य जारी हैं। वहीं, बरियारपुर प्रखंड में हरिणमार और झौवा बहियार को जोड़ने वाले बिचली पुल के पास गंगा का पानी भर गया है, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए जिला प्रशासन ने निशुल्क नाव की व्यवस्था की है, लेकिन प्रभावित इलाकों में पानी फैलने के कारण आवागमन और जरूरी सामान पहुंचाने में कठिनाइयां आ रही हैं। बाढ़ और कटाव का खतरा ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा रहा है।
ग्रामीण घर छोड़कर घाट पर पहुंच रहे हैं
जाफरनगर पंचायत के सीताचरण गांव में गंगा का पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों को अपने घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है। कई परिवार बबुआ गंगा घाट पर शरण ले चुके हैं। नाव के जरिए वे अपने मवेशियों और चारे को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। अन्य प्रभावित इलाकों में भी घरों में पानी घुसने के बाद लोग ऊंचे स्थानों पर चले गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे खेतों में पानी भरने के कारण खड़ी फसलें डूब चुकी हैं। सीताचरण में पानी पहुंचने के बाद लोग अपने परिवार और पशुओं के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ रहे हैं। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
जिला प्रशासन का कहना है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित इलाकों का आकलन किया जा रहा है और बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तैयारी है। आवश्यकतानुसार प्रभावित लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। हालांकि, अभी भी बाढ़ पीड़ित प्रशासन और सरकार की मदद का इंतजार कर रहे हैं।











