ब्रिक्स सम्मेलन में अनुवादकों की भूमिका महत्वपूर्ण
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत हो रही थी, उस समय उनके साथ दो ऐसे चेहरे भी नजर आए, जो हर उच्चस्तरीय बैठक में उनके बगल में खड़े रहते हैं। इन दोनों व्यक्तियों का नाम और भूमिका खासतौर पर चर्चा का विषय बन गया है। ये दोनों कोई सामान्य अधिकारी नहीं हैं, बल्कि भारत और चीन के सबसे विश्वसनीय और अनुभवी दुभाषिए (Interpreters) हैं, जो दोनों देशों के नेताओं के बीच संवाद का सेतु बनते हैं।
भारत और चीन के अनुभवी इंटरप्रेटर हैं प्रमुख कूटनीतिक स्तंभ
इन अनुवादकों में से एक का नाम सिद्धार्थ बाबू है, जो भारत के विदेश सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। वहीं, चीन के साथ लंबे समय से जुड़े हुए चीनी अधिकारी का नाम सन लिंग है। शी जिनपिंग के बगल में खड़े व्यक्ति का नाम सन निंग (Sun Ning) है, जो 1981 में नानजिंग (Nanjing) में जन्मे हैं। चीन में उन्हें ‘अनुवाद का पहला नाम’ कहा जाता है, क्योंकि उनकी भाषा दक्षता और अनुवाद कौशल अत्यंत उच्च स्तर का माना जाता है।
सन निंग की शिक्षा और करियर का सफर
सन निंग ने नानजिंग फॉरेन लैंग्वेज स्कूल में पढ़ाई की और बीजिंग फॉरेन स्टडीज़ यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में दक्षता हासिल की। उन्होंने ब्रिटेन में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की और अगस्त 2003 में चीनी विदेश मंत्रालय के अनुवाद विभाग में शामिल हो गए। चीन में विदेश मंत्रालय में अनुवादक के रूप में चयनित होना अत्यंत कठिन प्रक्रिया है, जिसमें कई दौर के मूल्यांकन होते हैं। सन निंग की सबसे बड़ी विशेषता उनका व्यापक ज्ञान, दोनों भाषाओं पर मजबूत पकड़, शांत स्वभाव और सरल स्वभाव है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में चीन के पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की प्रेस कॉन्फ्रेंस का सफल अनुवाद और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं में उनका महत्वपूर्ण योगदान शामिल है। विशेष रूप से फरवरी 2012 में जब शी जिनपिंग अमेरिका यात्रा पर गए थे, तब सन निंग उनके साथ अनुवादक के रूप में मौजूद थे।
भारत के प्रमुख अनुवादक सिद्धार्थ बाबू का परिचय
वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अक्सर नजर आने वाले अधिकारी सिद्धार्थ बाबू का जन्म केरल के कोच्चि में हुआ है। वे 2017 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं। सिद्धार्थ बाबू कई भाषाओं में दक्ष हैं, विशेषकर मंदारिन (Mandarin) और अंग्रेजी। वे अक्सर प्रधानमंत्री मोदी के साथ विभिन्न उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में इंटरप्रेटर के रूप में भाग लेते हैं।
उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित Middlebury Institute of International Studies, Monterey से भाषा और कूटनीति की शिक्षा प्राप्त की है। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा है कि एक डिप्लोमेट के रूप में, भाषा और संस्कृति के बीच पुल बनाना अत्यंत आवश्यक है। सही अनुवाद और संवाद की कुशलता से ही देशों के बीच बेहतर संबंध स्थापित होते हैं।
कूटनीति में अनुवादकों का महत्व और भूमिका
इन दोनों ही अनुवादकों का कार्य केवल भाषा का अनुवाद करना नहीं है, बल्कि वे दोनों देशों के बीच संवाद को सहज और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उच्चस्तरीय कूटनीति में एक छोटी सी गलती भी गलतफहमी का कारण बन सकती है, इसलिए नेताओं के साथ भरोसेमंद और अनुभवी अनुवादकों का होना अनिवार्य है।
सन निंग और सिद्धार्थ बाबू न केवल भाषा के पुल हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद और समझदारी को मजबूत बनाने वाले महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्तंभ भी हैं। इनकी भूमिका न केवल तकनीकी है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों की नींव भी हैं।










