राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा में कटौती का विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस ले ली है। तेजस्वी ने इस निर्णय को राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम बताते हुए सरकार के कदम की निंदा की है।
इससे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। आरजेडी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के उद्देश्य से उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है। पार्टी का तर्क है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा और मानकों के आधार पर किया गया है।
सुरक्षा समीक्षा और नेताओं की प्रतिक्रिया
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि लालू यादव और राबड़ी देवी के बाद अब तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्ष के प्रमुख नेताओं को टारगेट कर रही है और उनकी सुरक्षा में समझौता कर रही है। पार्टी का मानना है कि लालू यादव लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली नेता हैं, और उनकी सुरक्षा में अचानक हुई कटौती कई सवाल खड़े करती है।
शुक्रवार को हुई सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू और राबड़ी को प्राप्त Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटा दी गई। अब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बिहार पुलिस के जवानों को सौंपी गई है। हालांकि, आरजेडी इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है और इसे नेताओं की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना है।
तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं की सुरक्षा स्थिति
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें पहले की तरह Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी, क्योंकि उनका पद कैबिनेट मंत्री के समान माना जाता है। वे लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, जनसभाओं और विभिन्न जिलों के दौरे कर रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है।
हालांकि, लालू और राबड़ी की सुरक्षा हटाने के बाद तेजस्वी ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा हटा ली है। साथ ही, सुरक्षा समीक्षा का असर तेजप्रताप यादव पर भी पड़ा है। पहले उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी या अंगरक्षक ही उपलब्ध कराया गया है।









