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Home बिहार

तेजस्वी ने तेज प्रताप यादव के खिलाफ महुआ सीट पर रणनीतिक चक्रव्यूह रचा

by लोक आवाज़ 24×7 स्टाफ
29/10/2025
in बिहार
तेजस्वी ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव के खिलाफ महुआ सीट पर रचा चक्रव्‍यूह
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बिहार की महुआ विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्त्व

बिहार की राजनीति में महुआ विधानसभा सीट का स्थान सदियों से खास रहा है। यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और लालू यादव की सामाजिक न्याय की राजनीति से गहराई से जुड़ी हुई है। 2000 और 2005 के चुनावों में यहां आरजेडी (RJD) ने मजबूत पकड़ बनाई थी, जब लालू यादव की लोकप्रियता चरम पर थी। 2010 में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के रविंद्र राय ने इस सीट पर जीत हासिल की, जो एनडीए (NDA) की लहर का संकेत था। लेकिन 2015 में तेज प्रताप यादव ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HUM) के रविंद्र राय को भारी अंतर से हराकर फिर से आरजेडी का झंडा फहराया। इस जीत का प्रतिशत लगभग 43% था, जो यादव-मुस्लिम गठबंधन की ताकत का प्रतीक है। 2020 के चुनाव में तेज प्रताप ने हसनपुर (समस्तीपुर) से जीत दर्ज की, जबकि महुआ पर आरजेडी के मुकेश कुमार रौशन ने जेडीयू की आशमा परवीन को हराया। इस सीट का चुनाव कोविड महामारी के दौरान हुआ था, जिसमें मतदाताओं का रुझान विकास और रोजगार के मुद्दों की ओर था।

वोटबैंक और जातिगत समीकरण

महुआ सीट पर जीत-हार का समीकरण यादव वोटबैंक, दलित समुदाय, मुस्लिम समर्थन और विकास के मुद्दों पर टिका है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2,86,500 है, जिनमें 21.17% दलित, 15.10% मुस्लिम, और बाकी यादव, कोइरी-कुर्मी और अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) शामिल हैं। युवा मतदाता (18-30 वर्ष) बहुमत में हैं, और वे मुख्य रूप से विकास और रोजगार के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जातिगत समीकरण इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यादव (25-30%) का कोर वोटबैंक तेज प्रताप यादव का समर्थन करता है, लेकिन उनके साथ बंटवारा तय माना जाता है। मुस्लिम मतदाता (15%) आमतौर पर आरजेडी की ओर झुकते हैं, जबकि दलित (21%) मुख्य रूप से पासवान समुदाय का समर्थन करते हैं। OBC वर्ग जेडीयू (JDU) की ओर झुकाव दिखाता है। महिलाओं (लगभग 48%) विकास वादों और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देती हैं, जिसमें तेज प्रताप का मेडिकल कॉलेज का वादा आकर्षण का केंद्र है।

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तेज प्रताप यादव की चुनावी संभावनाएं और चुनौतियां

तेज प्रताप यादव की जीत का आधार उनकी 2015 में मिली सफलता है, लेकिन वर्तमान में परिस्थितियां अधिक जटिल हो गई हैं। सबसे बड़ा खतरा यादव वोट का बंटवारा है, क्योंकि तेजस्वी यादव का समर्थन प्राप्त मुकेश रौशन यादव वोट का बड़ा हिस्सा ले सकते हैं। 2020 के चुनाव में रौशन ने स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क, बिजली पर ध्यान केंद्रित किया था, जिसने ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित किया। तेज प्रताप का सोशल मीडिया पर सक्रियता और परिवार से बाहर होने का संकेत उनके राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकता है। उनके विवादास्पद बयानों और पुरानी शादियों की अफवाहें भी वोटरों को दूर कर सकती हैं। यदि मतदान प्रतिशत 60% रहता है, तो एनडीए (NDA) को फायदा हो सकता है। एनडीए के संजय कुमार सिंह दलित वोट (21%) और पासवान समुदाय को एकजुट करने में सफल हो रहे हैं, जबकि तेज प्रताप की छवि विवादास्पद बनी हुई है।

जातिगत और सामाजिक समीकरण का प्रभाव

अगर दलित वोट (21%) का बड़ा हिस्सा एनडीए (NDA) को जाता है और यादव वोट बंट जाता है, तो तेज प्रताप तीसरे स्थान पर रह सकते हैं। पूरे बिहार की तरह ही महुआ में भी जीत-हार का निर्धारण जाति समीकरणों से होता है। यादव वोट (25-30%) तेज प्रताप का मुख्य आधार है, लेकिन रौशन के साथ बंटवारा तय माना जाता है। मुस्लिम मतदाता (15%) आमतौर पर आरजेडी की ओर झुकते हैं, लेकिन तेज प्रताप का ‘लालू का बेटा’ टैग उन्हें खींच सकता है। दलित वोट (21%) पासवान समुदाय का समर्थन करता है, जो लोजपा (LJP) का गढ़ है। OBC वर्ग (कोइरी-कुर्मी) जेडीयू (JDU) की ओर झुकाव दिखाता है। महिलाओं का बहुमत विकास वादों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर वोट करता है, जिसमें तेज प्रताप का मेडिकल कॉलेज का वादा प्रमुख है।

आशावाद और संभावित जीत के कारण

तेज प्रताप यादव की जीत के पीछे मुख्य कारण उनकी पारिवारिक विरासत और स्थानीय समर्थन है। लालू यादव की सामाजिक और राजनीतिक विरासत अभी भी महुआ में मजबूत है। 2015 में तेज प्रताप ने इसी वोटबैंक का 80% से अधिक समर्थन हासिल किया था। सोशल मीडिया पर #TejPratapYadav जैसे ट्रेंड्स और समर्थकों की भावनाएं उन्हें मजबूत कर रही हैं। यादव समुदाय में उनके प्रति समर्थन अभी भी कायम है, और उनके समर्थक उन्हें ‘परिवार से निकाले गए बेटे’ के रूप में देख रहे हैं। यदि यादव वोट बंटता है, तो तेज प्रताप का समर्थन बढ़ सकता है। इसके अलावा महुआ में बन रहे मेडिकल कॉलेज और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके द्वारा किए गए विकास कार्य भी उनके पक्ष में हैं। ग्रामीण वोटर उनके सादगीपूर्ण प्रचार और खेत जोतने जैसी छवि को पसंद कर रहे हैं। यदि यादव वोट और मुस्लिम वोट मिलकर 70% से अधिक हो जाते हैं, तो तेज प्रताप 70,000 से 80,000 वोटों का आंकड़ा पार कर सकते हैं, जो 2020 के मुकाबले अधिक है।

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