मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी एफसीआई की स्थिति
मध्य प्रदेश में एथेनॉल बनाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने चावल के कथित बड़े पैमाने पर डायवर्जन की खबरों पर स्पष्ट रुख अपनाया है। एफसीआई ने एक आधिकारिक बयान में मीडिया में चल रही 1160 करोड़ रुपये की गबन की अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। निगम का कहना है कि लगभग 5 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल के गबन का दावा पूरी तरह से निराधार है, क्योंकि इन चावलों को डिस्टिलरियों ने वैध भुगतान कर खरीदा है।
एथेनॉल सप्लाई और चावल का वितरण
एफसीआई के अनुसार, वर्ष 2024-25 के ईथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) में मध्य प्रदेश की डिस्टिलरियों को 2.98 एलएमटी चावल 22.50 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद वर्ष 2025-26 में 30 जून 2026 तक 2.41 एलएमटी चावल 23.20 रुपये प्रति किलो की दर से जारी किया गया। इस तरह दोनों वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 5.39 एलएमटी चावल विधिवत वितरित किया गया। निगम ने स्पष्ट किया कि मीडिया में उल्लेखित 1160 करोड़ रुपये की राशि इन चावलों के जारी मूल्य के आधार पर निकाली गई है, जिसे डिस्टिलरियों ने पूरी तरह से भुगतान किया है। इसलिए, इन चावलों के कथित गबन या डायवर्जन का कोई संबंध नहीं है।
मामले की जांच और संबंधित कार्रवाई
एफसीआई ने बताया कि वर्तमान में चल रही जांच पूरे 5 एलएमटी चावल के स्टॉक से संबंधित नहीं है, बल्कि केवल 490 बोरियों यानी लगभग 242.50 क्विंटल चावल के कथित डायवर्जन से जुड़ी है। इस मात्रा का अनुमानित मूल्य लगभग 5.63 लाख रुपये है। इसलिए पूरे चावल के मूल्य को इन छोटी अनियमितताओं से जोड़ना पूरी तरह भ्रामक है।
एफसीआई के अनुसार, इस अनियमितता का पता पहले ही सरकारी एजेंसियों ने लगा लिया था और मीडिया रिपोर्ट्स प्रकाशित होने से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। जून 2026 के पहले सप्ताह में चावल की ढुलाई में गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित डिस्टिलरी को नोटिस जारी किया गया और 5 जून 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद 11 जून को एक संयुक्त निरीक्षण दल ने मौके का निरीक्षण कर बरामद चावल की बोरियों और एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत जारी खेपों के बीच प्रारंभिक संबंध स्थापित किया।
एफसीआई ने जांच पूरी होने तक संबंधित डिस्टिलरी की सुरक्षा राशि रोक दी है और उसे आगे चावल का आवंटन भी बंद कर दिया है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने संबंधित राइस मिल पर 44.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है। एफसीआई ने कहा है कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











