राबड़ी देवी ने 20 वर्षों से अधिक समय बाद पटना का सरकारी बंगला छोड़ा
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आखिरकार अपने लंबे समय से रह रहे सरकारी आवास ’10 सर्कुलर रोड’ को खाली कर दिया है। यह बंगला पिछले लगभग दो दशकों से उनके परिवार का मुख्य ठिकाना रहा है। गुरुवार को लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार ने इस सरकारी बंगले को छोड़कर कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी घर में स्थानांतरित हो गए हैं।
बंगला छोड़ने का कारण और राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 2005 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने राबड़ी देवी को यह बंगला आवंटित किया था। यह बंगला मुख्यमंत्री आवास के सामने और राजभवन से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है। लगभग 20 वर्षों तक यह बंगला लालू परिवार का मुख्य आशियाना रहा, साथ ही यह आरजेडी का मुख्य कार्यालय भी था।
सरकारी बंगला खाली करने की प्रक्रिया और राजनीतिक विवाद
राजनीतिक दबाव और सरकार के कड़े रुख के चलते राबड़ी देवी ने यह बंगला खाली किया है। सरकार ने इसे बीजेपी नेता और मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। बंगला खाली कराने की प्रक्रिया पिछले साल नवंबर में शुरू हुई, जब नीतीश सरकार ने इसे उपमुख्यमंत्री आवास घोषित कर दिया। इसके बदले राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के नाते ’39 हार्डिंग रोड’ का बंगला दिया गया था।
शुरुआत में राबड़ी देवी ने हार्डिंग रोड वाले बंगले में जाने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह आकार में ’10 सर्कुलर रोड’ जितना बड़ा नहीं था और अंधविश्वास के कारण भी। राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि इस बंगले में रहने वाले नेताओं का करियर गिरावट की ओर चला जाता है।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद राबड़ी देवी ने अपना रुख बदला और आखिरकार अपने पुराने बंगले को छोड़ने का फैसला किया। उनके बेटों के पास अभी भी सरकारी आवास मौजूद हैं, जिनमें तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव शामिल हैं।










