आरा सिविल कोर्ट ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कड़ा रुख अपनाया
आरा (Bihar) की सिविल कोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर से जुड़े इस जटिल मामले में सख्त कदम उठाए हैं। मुख्य दंडाधिकारी (CJM) ने घटना की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम (SDM), एसडीपीओ (SDPO), और शाहपुर थाने के थानाध्यक्ष सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए हैं।
अदालत का निर्देश और आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश
इसके साथ ही, अदालत ने भोजपुर (Bhojpur) के पुलिस अधीक्षक (SP) को 12 अगस्त तक व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह मामला भरत तिवारी की हत्या के संदर्भ में है, जिनकी परिजनों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने साजिश के तहत उन्हें फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। इस घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा था।
परिजनों की न्याय की आशा और कोर्ट का फैसला
वारंट जारी होने के बाद मृतक भरत तिवारी के परिवार में न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है। कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भरत की मां और भाई ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जिस तरह से अन्याय किया, अब अदालत से उन्हें न्याय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भरत की मां ने यह भी मांग की कि सभी दोषियों को फांसी की सजा दी जाए ताकि उनके दिल को शांति मिले।










