पुरानी दिल्ली के बाजारों में लोडिंग और अतिक्रमण पर विवाद
पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में लोडिंग और अनलोडिंग पर लगाए गए प्रतिबंध, साथ ही अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण की समस्या को लेकर व्यापारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इन मुद्दों का समाधान खोजने और बाजारों की व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित बनाने के लिए 3 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 200 व्यापारिक संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए।
व्यापारियों की मुख्य चिंताएं और समाधान की दिशा
इस बैठक में पुरानी दिल्ली के विभिन्न बाजारों से जुड़े व्यापारियों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। उन्होंने प्रशासन से स्थायी और व्यावहारिक समाधान की मांग की। व्यापारियों का तर्क है कि माल की आवाजाही, यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण से संबंधित मुद्दों का संतुलित समाधान आवश्यक है ताकि बाजार की सुगमता बनी रहे।
माल की लोडिंग-उतारने पर प्रतिबंध और व्यापारिक व्यवस्था
बैठक का मुख्य विषय चांदनी चौक में माल की लोडिंग और अनलोडिंग पर लगाए गए प्रतिबंध का रहा। व्यापारियों ने कहा कि माल चढ़ाना और उतारना बाजार की बुनियादी गतिविधि है। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इन प्रतिबंधों से दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों और ग्राहकों को परेशानी हो रही है। उनका मानना है कि इससे जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
व्यापार-अनुकूल व्यवस्था और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई
व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि चांदनी चौक की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जो व्यापार और यातायात दोनों को प्रभावित किए बिना काम करे। साथ ही, अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में समानता और पारदर्शिता की मांग की गई। व्यापारियों का आरोप है कि कई इलाकों में अवैध कब्जों को हटाने के बजाय दुकानदारों के छज्जे, बोर्ड और संरचनाओं पर ही कार्रवाई हो रही है।
सदर बाजार में भी अतिक्रमण की समस्या को लेकर व्यापारियों ने नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि वहां बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी सड़क और बाजार के रास्तों पर कब्जा कर रही हैं, लेकिन नगर निगम और पुलिस की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके विपरीत, राखी से पहले और बाद में दुकानदारों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई।
व्यापारिक संगठन चाहते हैं कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और समान हो। उनका मानना है कि केवल दुकानदारों को निशाना बनाना सही नहीं है, बल्कि अवैध कब्जों का स्थायी समाधान जरूरी है। बैठक में यह भी तय किया गया कि पुरानी दिल्ली के बाजारों में व्यापार और यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।
अंत में, व्यापारियों ने फैसला किया है कि आगामी मंगलवार को वे अपने मुद्दों को लेकर उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे। इस दौरान करीब 3 से 4 हजार व्यापारी तीर्थ राम शाह अस्पताल से शांतिपूर्ण मौन मार्च निकालेंगे। यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा, ताकि प्रशासन को पुरानी दिल्ली की बाजारों से जुड़ी समस्याओं का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
व्यापारियों को उम्मीद है कि इस मार्च और ज्ञापन के बाद प्रशासन लोडिंग, अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण से संबंधित मुद्दों पर ठोस कदम उठाएगा। उनका मानना है कि शहर की यातायात व्यवस्था और बाजार की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रह सकें।










